फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों की मेहनत से लगातार बढ रही खाद्यान्न की उत्पादकता

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। बढ़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करने के संकल्प के रूप में रविवार को विश्व खाद्य दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन हम सहारनपुर में अनाज उत्पादन की स्थिति की बात करें तो भविष्य की चुनौतियां बढ़ रही हैं। कृषि जोत का आकार घट रहा है। प्रमुख अनाज गेहूं का उत्पादन एक जगह आकर ठहर सा गया है। तीन सालों में उत्पादन में वृद्धि नहीं हुई है।
विज्ञापन

धान और मक्का का उत्पादन और रकबा बढ़ा हैं लेकिन इनके प्रति किसानों का रुझान कम हो रहा है और धान व गेहूं के मुकाबले इनका रकबा बहुत कम है। बाजरा और ज्वार जैसी फसल खेतों से गायब हो चुकी हैं। वर्ष 2016- 17 में जिले में गेहूं की औसत उत्पादकता 37.57 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, जो अगले साल बढ़कर 43.74 क्विंटल पर पहुंच गई। लेकिन उसके बाद के तीन सालों में यह गिरी और दो साल से 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पर ठहरी हुई है।
पिछले सात वर्षों में गेहूं का क्षेत्रफल भी 90 हजार हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 1.11 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद है। जनपद में धान का रकबा 58 हेक्टेयर और मक्का की खेती करीब मात्र 700 हेक्टेयर में होती है। ज्वार और बाजरे की फसल तो किसान पशुओं के चारे की जरूरत पूरा करने के लिए बो रहे हैं। मक्का की औसत उत्पादकता में भी उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले दो सालों में ही छह क्विंटल प्रति हेक्टेयर की गिरावट इसमें आई है। संवाद
विज्ञापन

- जनपद में गेहूं, धान और गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ा है। दलहनी फसलों की खेती में किसान कम रुचि दिखा रहे हैं। जिससे इन फसलों का रकबा घट रहा है। डॉक्टर राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि।
लगातार फसल लेने और फसल चक्र नहीं अपनाने के चलते मृदा में जीवांश कार्बन की कमी आई है। इसके अलावा मौसम के उतार चढ़ाव के कारण गेहूं, मक्का समेत अन्य फसलों की उत्पादकता में ठहराव आया है। - डॉ. आई के कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र
विज्ञापन

पांच वर्षों की खाद्य उत्पादकता ( क्विंटल प्रति हेक्टेयर)
फसल 2018-19 2019-20 2020-21 2021-22
धान 25.21 27.03 27.72 31.09
मक्का 23.88 25.54 26.48 20.06
गेहूं 42.12 38.92 40.83 40.67
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें