सहारनपुर। अनदेखी के कारण सोलर ओजोन रिएक्टर एक साल में ही अस्त व्यस्त हो गए हैं। यह रिएक्टर पांवधोई नदी के पानी को शुद्ध बनाने के लिए लगाए गए थे, जिन पर 20 लाख रुपये की लागत आई थी।
पांवधोई नदी को साफ करने के लिए नगर निगम बीते करीब 14 वर्ष से समय-समय पर अभियान चलाता रहा है। इसी क्रम में नगर निगम ने जून 2023 में पांवधोई नदी में पांच स्थानों पर सोलर ओजोन रिएक्टर लगाए थे। प्रत्येक रिएक्टर पर करीब पांच लाख रुपये की लागत आई थी, लेकिन उसके बाद निगम ने इन रिएक्टर की सुध नहीं ली कि यह किस स्थिति में हैं। इनमें से ज्यादातर रिएक्टर अस्त-व्यस्त हो चुके हैं। बरसात में आई बाढ़ के कारण इनका जाल पानी में गिरा हुआ है। ऐसे में एक ओर जहां 20 लाख रुपये कचरा बन रहे हैं वहीं पानी को साफ करने की सोच भी साकार नहीं हो पा रही है।
ऐसे काम करता है सोलर ओजोन रिएक्टर
सोलर ओजोन रिएक्टर के माध्यम से हवा पानी में आक्सीजन की मात्रा को बढ़ाती है, जबकि ओजोन पानी में रहने वाले बैक्टीरिया को मारती है, साथ ही जो केमिकल जैसे पेस्टीसाइड आदि बहकर आते हैं उनको निष्प्रभावी बनाती है। इस तरह से हवा और ओजोन दोनों मिलकर पानी को शुद्ध बनाने का काम करते हैं, लेकिन पांवधोई के पानी को शुद्ध करने के लिए ऐसे हजारों सोलर ओजोन रिएक्टर की जरूरत है।
सोलर ओजोन रिएक्टर यदि नगर निगम ने लगवाए हैं तो उनको दिखवाया जाएगा। प्रयास रहेगा कि जिस मकसद के लिए वह लगाए गए हैं वह मकसद पूरा हो।
- बीके सिंह, मुख्य अभियंता निर्माण, नगर निगम