सहारनपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी बहुत महिलाएं हैं जिन्होंने विपरीत हालात में कम पढ़े लिखे होने के बावजूद अपने हुनर को अपने स्वरोजगार का जरिया बना लिया। लोगों के तानों की परवाह नहीं की, अपने काम को ईमानदारी से अंजाम दिया और आज आत्मसम्मान के साथ परिवार की जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही हैं। ये महिलाएं औरों के लिए भी नजीर बनी हैं। पेश है अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस पर ऐसी कुछ महिलाओं की सफलता की कहानी-
टिफन सिस्टम को बनाया स्वावलंबन का जरिया
नागल के गांव मीरपुर मोहनपुर निवासी बबली के पति सुभाष की दस वर्ष पूर्व बीमारी के चलते मौत हो गई थी। बबली बताती हैं उस समय उसकी जिंदगी में अंधेरा ही अंधेरा दिख रहा था। तीनों बच्चे छोटे थे और बबली खुद भी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी। न ही पति कोई रोजगार छोड़ गए थे। ऐसे में उसने अपनी पाक कला को स्वरोजगार का साधन बनाया। उसने टिफन सिस्टम शुरू किया। देखते ही देखते उसका यह काम चल निकला। इस स्वरोजगार से वह सम्मान के साथ तीनों बच्चों को पढ़ा रही हैं। अपना मकान भी उन्होंने बना लिया है। किसी समय दया की पात्र बनी बबली आज दूसरों के लिए नजीर बनी है।
35 वर्षों से बना रहीं अचार, राज्यपाल भी कर चुकीं तारीफ
साल्हापुर की मुकेश रानी पत्नी सुखपाल सिंह 35 वर्षों से अचार बनाने का कार्य कर रही हैं। शुरुआत में वे अपने घर के लिए अचार बनाती थीं तो रिश्तेदार अचार खा कर उसकी तारीफ करते थे। इससे उनके मन में इसे व्यावसायिक रूप देने का विचार आया। वे आम, लौकी, गोभी, लहसुन, प्याज, आंवला, हरड़ आदि अनेक वैरायटी के अचार बनाती हैं। कई महिलाओं को भी उनके यहां रोजगार मिला है। जिला कृषि विज्ञान केंद्र कंपनी बाग आदि में लगने वाली प्रदर्शनी में भी अपने अचार की स्टाल लगाती हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी एक प्रदर्शनी के दौरान उनके अचार की तारीफ कर चुकी हैं। मुकेश बताती हैं कि वे अपने अचार के ब्रांड को पेटेंट कराकर छोटी इकाई लगाना चाहती हैं।
एक साल में कारोबार पहुंचाया ढाई लाख तक
बेहट तहसील के गांव फतेहपुर कला की रितु चौहान कुछ महिलाओं के साथ मिल कर अचार और मुरब्बे बना रही हैं। बताया कि 30 हजार से शुरू किया गया कारोबार एक साल में ढाई लाख तक पहुंच गया है। उनके उत्पाद दिल्ली, नोएडा, पुणे (महाराष्ट्र) तक सप्लाई हो रहे हैं। गांव के पूर्व प्रधान राजकुमार शर्मा उसके प्रेरणास्रोत हैं। गत दिनों उसने अपने उत्पाद जिले के दौरे पर आए रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव को भी भेंट किए थे।
बैग सील कर बच्चों को बनाया काबिल
गंगोह के मोहल्ला बाबूराय निवासी अनीता गोयल के पति मुकेश गोयल का 17 वर्ष पूर्व निधन हो गया था। उस वक्त उनका बेटा हिमांशु 12 साल और बेटी दीपाली मात्र 10 वर्ष के थे। रोजगार का कोई साधन नहीं था। छठी कक्षा पास अनीता ने सिलाई के हुनर को अपना रोजगार बनाया। उन्होंने बैग सिलने शुरू किए। धीरे-धीरे उनका काम चलने लगा और सब उन्हें बैग वाली आंटी के नाम से पहचानने लगे। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारकर हौसले के साथ अपने बच्चों की परवरिश की। आज उनका बेटा हिमांशु शिवालिक बैंक सहारनपुर में कार्यरत है, जबकि बेटी शिवानी की भी शादी हो चुकी है।
रितु चौहान- फोटो : SAHARANPUR
मुकेश रानी- फोटो : SAHARANPUR
बबली- फोटो : SAHARANPUR