चिलकाना (सहारनपुर)। दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से जूझ रहे एक बच्चे के पिता ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर बच्चे को बचाने के लिए इस बीमारी में लगने वाले इंजेक्शन को मंगवाने की गुहार लगाई है। इस बीमारी में हड्डियां मांस से अलग होकर गलने लगती है।
चिलकाना के गांव डिंडोली खेड़ा निवासी रजनीश पुत्र घसीटू ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर बताया कि उसका 12 वर्षीय बच्चा भवी असाध्य बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित है। इस बीमारी में मांस हड्डियों का साथ छोड़ देता है, हड्डियां गलने लगती हैं तथा कुछ समय बाद ही व्यक्ति की मौत हो जाती है। इस बीमारी में लगने वाला इंजेक्शन भारत में नहीं मिलता है। इस इंजेक्शन को अमेरिका से मंगवाना पड़ता है। इस बीमारी के एक इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपये है। अमेरिका की एक दवा कंपनी ने 100 बच्चों के लिए इस इंजेक्शन को निशुल्क देने की पेशकश की है। पत्र में कहा है कि इस बीमारी से गोंडा जनपद के एक बच्चे के इलाज के लिए विधान परिषद अवधेश कुमार द्वारा अपने प्रयास से इंजेक्शन मंगवाया गया था।
रजनीश ने महामहिम राष्ट्रपति से मांग की है कि उसके बच्चे को बचाने के लिए उनके स्तर से कोई प्रयास होना चाहिए। बच्चे को इस असाध्य बीमारी से बचाव के लिए इंजेक्शन अमेरिका से मंगवा कर बच्चे की जान बचाई जाए। बच्चे का इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है तथा सीसीएमबी हैदराबाद ने भवी की बीमारी की पुष्टि की है।