देवताओं की करुण पुकार सुनकर करुणामयी मां भगवती देवताओं के समक्ष प्रकट हो गई। देवताओं ने उनसे तीनों लोक का अकाल मिटाने की प्रार्थना की। इस पर मां जगदंबा ने अपने शत नेत्रों से नौ दिन एवं नौ रात तक अश्रु वृष्टि की। इससे सूखी धरा तृप्त हो गई। सभी सागर एवं नदियां जल से भर गई। मां भगवती ने देवताओं की भूख मिटाने के लिए अपनी शक्ति से पहाड़ियों पर शाक एवं फल उत्पन्न किए जिसके बाद वह माता शाकंभरी कहलाई।
आज से शुरू होगा 15 दिवसीय मेला
सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में आज से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र मेले की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने का अनुमान है। जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी मांगेराम ने बताया कि मेले का उद्घाटन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी शाम चार बजे करेंगे। मेला इंचार्ज अविनाश गौतम ने बताया कि मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 58 सब इंस्पेक्टर/सब इंस्पेक्टर, 6 महिला सब इंस्पेक्टर, 140 हेड कांस्टेबल, 65 महिला कांस्टेबल, 40 होमगार्ड, 22 ट्रैफिक सिपाही, दो एपी गारद, एक कंपनी पीएसी, दो फायर ब्रिगेड, एक टीम एलआईयू, एक टीम मेटल डिटेक्टर जल्द ही मेले में पहुंच जाएगी।
अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शंकराचार्य आश्रम प्रभारी सहजानंद ब्रह्मचारी जी ने बताया शारदीय नवरात्र में आदिशक्ति देवी दुर्गा उसके नौ रूपों की विशेष आराधना की जाती है। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक वर्ष की चार संधियां हैं। उनमें मार्च और सितंबर-अक्तूबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में वर्ष के दो मुख्य नवरात्र हैं। इस समय रोगों से ग्रस्त होने की सबसे अधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं।