सहारनपुर। मोहर्रम के तहत आयोजित मजलिसों में हजरत इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम की शहादत की जानकारी दी।
मोहल्ला जाफरनवाज स्थित बड़ी इमाम बारगाह में आयोजित मजलिस में मौलाना सैय्यद मोहम्मद अब्बास रिजवी और छोटी इमाम बारगाह में मजलिस के दौरान मौलाना सैय्यद मोहम्मद अब्बास रिजवी (मोनिस) ने हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के भाई व लश्कर के सिपहसालार हजरत अब्बास अलमदार की शहादत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा, हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम एक बहादुर जवान थे, जिन्होंने अपने भाई हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के साथ करबला की जंग बड़ी बहादुरी के साथ लड़ी और शहीद हुए। हजरत अब्बास को इराक के करबला में दफनाया गया। हजरत अब्बास ने 11 वर्ष की आयु में सिफिन की लड़ाई में एक सैनिक के रूप में शुरुआत की। हजरत अब्बास इब्न अली अलैहिस्सलाम ने कई दुश्मन सैनिकों को मार डाला। हजरत अब्बास जंग के मैदान के पास से बह रही नहर-ए-फरात से पानी लेने गए थे। उनसे छोटे-छोटे बच्चे की प्यास देखी नहीं गई। तब, यजीदी लश्कर ने हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम को घेरकर हमला कर दिया था।
इसके साथ ही मजलिसों की शुरुआत में हुसैन जकी, डॉ. अमीर अब्बास, डॉ. अथर अली जैदी, आसिफ अल्वी, सलीम आब्दी, सलीस हैदर काजमी, ख्वाजा रईस अब्बास मरसियाख्वानी की, जिसमें कहा कि मजलूमे करबला का सदियों से तजकरा है। इस पर सितम हुए हैं, लेकिन ये न रुका है, रोते हैं जिस पर अहमद हम, क्यों न उस पर रोए, रोती है जहरा जिस पर हम, उस पर क्यों न रोए, शब्बीर अगर तेरी अजादारी न होती, मजलूम की दुनिया में तरफदारी न होती, शब्बीर का मकसद जो समझ लेता जमाना, कुरआन को समझने में यह दुश्वारी न होती। इस दौरान मंजर हुसैन काजमी, सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी, आसिफ रजा, मिर्जा मेहरबान, नईम मौजूद रहे।
इमाम बारगाह में मजलिस में भाग लेते लोग- फोटो : SAHARANPUR