इसके बाद न तो उनके पास शव का अंतिम संस्कार करने के लिए भूमि बची है और न ही वहां तक पहुंचने का रास्ता। जब भी गांव में किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो प्रशासनिक अधिकारी हर बार समस्या के समाधान का आश्वासन देकर दूसरी जगह अंतिम संस्कार कराकर चले जाते हैं। पिछले 15 साल से लगातार उनके साथ यहीं हो रहा है। इस बार ग्रामीण समस्या के समाधान तक शव का अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़े हुए थे। श्मशान की भूमि तक रास्ता बनवाए जाने के बाद ही ग्रामीण अंतिम संस्कार को राजी हुए।
यह भी पढ़ें: डबल मर्डर की ऐसी वारदात: कांप उठेगी रूह, थाने पहुंचा पूर्व पार्षद सऊद, बोला- नहर में फेंकीं दोनों की लाशें
श्मशान की भूमि तक जेसीबी से रास्ता बनवा दिया गया है, इसी की ग्रामीण मांग कर रहे थे। रास्ता बनने के बाद ग्रामीणों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया है।
- दीपक कुमार, एसडीएम बेहट