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रोजा अमीरों को भी कराता है भूख-प्यास का एहसास

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सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमन के संरक्षक मोलाना कारी इसहाक गोरो हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि रोजा अमीरों को भी भूख और प्यास का एहसास कराता है। इससे पैसे वाले लोगों को पता चलता है कि गरीब व्यक्ति का जीवन भूख और प्यास में कैसे गुजरता है। पवित्र रमजान माह एक तरफ खुदा की इबादत का महीना है, तो दूसरी तरफ शरीर को भी स्वस्थ बनाता है।
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सवाल- गाजियाबाद निवासी हाजी हसीन ने पूछा कि क्या नाबालिग लड़का तरावीह की नमाज अदा कर सकता है।
जवाब- नाबालिग लड़का तरावीह की नमाज अदा नहीं कर सकता है। क्योंकि, इमामत के लिए बालिग होना शर्त है।
सवाल- देहरादून निवासी सनाउल्लाह खान ने पूछा कि क्या हम घर में ऑनलाइन नमाज-ए-जमात कर सकते हैं। इस पर शरीयत का क्या हुक्म है।
जवाब- ऑनलाइन नमाज-ए-जमात करने की शरीयत में इजाजत नहीं है।
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