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Saharanpur News: बनते ही टूट गईं सड़कें, गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल, राहगीर बेहाल

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सहारनपुर। सड़कों की खराब गुणवत्ता और बनाने में बरती गई लापरवाही के कारण भी महानगर की सड़कें टूट रहीं हैं। जिसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। नगर निगम और पीडब्ल्यूडी द्वारा चार से छह महीने पहले बनाई गईं सड़कें जगह-जगह से दरक गईं हैं या फिर उनमें गहरे गड्ढे बन गए हैं।
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लोक निर्माण विभाग ने मार्च-अप्रैल 2023 में पुल जोगियान से बेहट रोड स्थित बालाजी धाम तक सड़क बनाने का कार्य शुरू किया था। खास बात यह है कि दो या चार जगह छोटी छोटी टूट के अलावा पूरी सड़क चिकनी और दुरुस्त थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने इसे बनाया। इसके बावजूद सड़क को कईं जगहों पर छोड़ दिया गया। चार लेन की इस सड़क के निर्माण पर 3.10 करोड़ रुपये की लागत आई, लेकिन बनने के दो ही महीने बाद सड़क पर बिछाया गया कोलतार और बजरी मोहल्ला छिपियान के बाहर से पुरानी सड़क को छोड़कर उखड़ गया। जिसके बाद नीचे की पुरानी सड़क निकल आई।
अमर उजाला में इस पर समाचार प्रकाशित किया गया, जिसके अगले ही दिन सड़क की मरम्मत कर दी गई, लेकिन बीते 15 दिन से सड़क फिर से उखड़ी हुई है। हॉटमिक्स मशीन से तैयार की गई 3.10 करोड़ की सड़क में ऐसी क्या कमी रही कि वह दूर तक जगह जगह से दरक गई है यानी उसमें दरारें आ गई हैं। नवाबगंज चौक पर गहरा गड्ढा बना हुआ है। पुल जोगियान के पास पेट्रोल पंप के सामने सड़क छोड़ी गई है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़क को बनाने की जरूरत नहीं थी। पुरानी सड़क ठीक थी, जिस पर नया माल सही से चिपक नहीं पाया। इसी तरह बेरीबाग में भी पीडब्ल्यूडी ने मार्च 2023 में सड़क बनाई थी, जो जगह जगह से टूटकर क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम द्वारा लोहानी सराय में बीते एक साल में दो बार सड़क बनाई जा चुकी है, लेकिन सड़क जगह जगह से टूटी हुई है।
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- जगह जगह से धंस रहीं सड़कें
महानगर में अनेक जगहों पर सड़कें अचानक से धंस रही हैं। दिल्ली रोड पर एसबीआई के सामने अचानक गहरा गड्ढा बन गया है। कलक्ट्रेट मंदिर के बाद सड़क दो जगहों से अचानक धंस गई है। पुल खुमरान पर इसी तरह सड़क धंसी है। सवाल यह है कि सड़क बनाते वक्त क्यों नहीं उसके गड्ढों को ठीक से भरा गया।
- नागरिकों की बात
- राजेंद्र कश्यप का कहना है कि सड़कों का बनते ही टूटना गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
- अधिवक्ता तुषार अग्रवाल का कहना है कि स्मार्ट सिटी होने के बावजूद सड़कें टूटी हैं। लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। समय रहते सड़कें नहीं दुरुस्त की तो कोर्ट जाएंगे।
- जसप्रीत का कहना है कि टूटी सड़कें स्मार्ट सिटी के नाम पर कलंक हैं। दस मिनट का सफर 30 मिनट में पूरा होता है। लेकिन अधिकारियों को परवाह नहीं।
- राधा कृष्ण गुडमॉर्निंग क्लब के अध्यक्ष भागीरथी सेठी का कहना है कि नवाबगंज सहित अनेक चौराहों की हालत खराब है। सड़कें टूटी होने के कारण हर कोई परेशान है।
- जिन सड़कों के टूटने की बात कही गई है। उन सड़कों को दो साल तक दुरुस्त करके देना ठेकेदार की जिम्मेदारी है। हम खुद भी सड़क का निरीक्षण करेंगे। जहां भी कमी आई है उसे दूर कराया जाएगा। - धर्मेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी।
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