सहारनपुर। कांवड़ यात्रा के कारण बंद सभी मार्ग खोल दिए गए हैं। जिसके बाद जिंदगी पटरी पर लौट आई है। वहीं, स्कूल-कॉलेज भी खुल गए हैं। दवा, फल और सब्जी की सप्लाई सुचारु हो गई है। गैस सिलिंडर की आपूर्ति भी होने लगी है। रूट डायवर्जन से रास्ते बंद होने के चलते ट्रांसपोर्टरों को रोजाना लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
कांवड़ यात्रा को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने दो चरणों में रूट डायवर्ट किया। पहला चरण 21 जुलाई से शुरू हुआ था, जो 29 जुलाई तक रहा। इसके बाद 29 जुलाई की रात्रि 12 बजे से दूसरे चरण का रूट डायवर्जन किया, जिसमें सभी भारी वाहनों के शहर में आवागमन पर रोक लगा दी थी। कांवड़ मार्ग पर केवल दोपहिया वाहनों का ही संचालन हो पाया। जिसके चलते मंडियों में सब्जी, फलों की आवक बंद हो गई थी।
दूसरे जिलों से दवा, बिजली ट्रांसफार्मर और गैस सिलिंडर से भरी गाड़ियों को रास्ते में ही रोक दी गई थी। कांवड़ यात्रा में रूट बंद होने का सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्टरों पर पड़ा। सहारनपुर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन अध्यक्ष ब्रित चावला ने बताया कि कांवड़ यात्रा में एक दिन में करीब छह लाख रुपये का नुकसान हुआ। जिले में 100 से 150 ट्रक सामान लेकर दूसरे राज्यों में लेकर आते व जाते हैं। वहीं पिछले एक सप्ताह से सरकारी कार्यालयों में सूनापन था। सभी कार्यालयों से जहां विभागाध्यक्षों को कांवड़ यात्रा में सेक्टर व जोनल मजिस्ट्रेट बनाया गया था। अब रास्ते खुले तो जिंदगी पटरी पर लौट आई है।
हटा ली गईं बैरिकेडिंग
कांवड़ यात्रा संपन्न होने के बाद कांवड़ मार्ग पर लगाई गई बैरिकेडिंग हटा ली गई है। इसके बाद कांवड़ मार्ग पर दोनों तरफ वाहनों का यातायात शुरू हो गया है। यही नहीं देहरादून, हरिद्वार, मेरठ, आगरा, अलीगढ़ जाने वाली बसें भी रेलवे रोड बस स्टैंड से संचालित होने लगी हैं। अभी तक यह बसें कांशीराम काॅलोनी से संचालित होती थीं।