जिला प्रशासन ने रविवार को ही लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाने को कहा था, जिसके बाद लोग ढमोला नदी का जल स्तर बढ़ता देख रविवार की रात ही निकल गए थे। वहीं अनेक परिवारों ने घरों का सामान छत पर चढ़ा लिया और रात जागकर छत पर ही गुजारी।
उधर, पांवधोई नदी से सटी विश्वासनगर, नाजिम कॉलोनी, धोबीघाट क्षेत्र में नदी का पानी सड़कों और लोगों के घरों में घुस गया। श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर के सामने घुटनों से ऊपर तक पानी की वजह से आवाजाही बंद कर दी गई। लोगों को रास्ता बदलकर अपने गंतव्य की ओर पहुंचना पड़ा।
इसके अलावा शहर भर के अनेक प्रमुख मार्गों, बाजारों और कॉलोनियों में भारी जलभराव रहा। उधर, तीन दिन में कुल 211 एमएम बारिश दर्ज की गई। शनिवार सुबह पांच से सुबह आठ बजे तक 26, शनिवार सुबह आठ से रविवार सुबह आठ बजे तक 80 एमएम और रविवार सुबह आठ से सोमवार सुबह आठ बजे तक 105 एमएम बारिश हुई।
प्रशासन और निगम राहत कार्य में जुटे
-बाढ़ आपदा प्रबंधन के तहत लगाए जा रहे राहत शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। ढमोला और पांवधोई नदी का पानी आबादी क्षेत्र में अनेक घरों में घुसने के बाद प्रशासन और नगर निगम अलर्ट हो गए हैं। बाढ़ आपदा प्रबंधन के तहत शिविर लगाए जा रहे हैं। जहां कईं व्यवस्थाएं जिला प्रशासन कर रहा है, जबकि राहत शिविर में रहने वालों के भोजन, पानी की व्यवस्था नगर निगम कर रहा है।
तीन राहत शिविर शुरू कर दिए गए हैं, जबकि पांच जगहों पर शिविर प्रस्तावित हैं। सोमवार को जो राहत शिविर शुरू किए गए हैं, वह गॉड फील्ड पब्लिक स्कूल देवपुरम/सिद्धि विनायक मंदिर नानकपुरम, वृंदावन गार्डन अंजलि विहार पेपर मिल रोड और मोहयाल धर्मशाला पंजाबी बाग शामिल हैं। इनमें सोमवार शाम पांच बजे तक क्रमश: 60, 10 और 102 लोग ठहरे हुए थे। इनके अलावा जहां राहत शिविर लगना प्रस्तावित है। उनमें केसीसीपी आर्य कन्या इंटर कॉलेज गिल कॉलोनी, जूनियर हाई स्कूल नुमाइश कैंप, एसएएम इंटर कॉलेज घंटाघर, सामुदायिक केंद्र हकीकतनगर, भूतेश्वर इंटर कॉलेज धोबीघाट शामिल हैं। राहत शिविर में ठहरे लोगाें को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इसके लिए जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है।
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छतों पर पन्नी के नीचे बैठकर बिताई रात
-- राहत शिविर में बच्चों के संग बैठी साकेत कॉलोनी निवासी सुनीता ने बताया कि घरों में दो से तीन फीट पानी भर जाने के चलते उन्होंने पन्नी की तिरपाल खरीदकर छत पर उसके नीछे बैठकर पूरी रात काटी।
-- राहत शिविर में मायूस बैठी पुष्पा ने बताया कि अचानक से पानी भर जाने से उनके घर का सारा सामान खराब हो गया है। खाने तक की व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। मजबूरन राहत शिविर में आना पड़ा है।
-रेनू ने बताया कि वह अपने घर और सामान को लेकर चिंतित हैं। किसी तरह अपनी और परिवार की जान बचाकर शिविर में पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने रविवार की रात दहशत में जागकर काटी।
बेहट क्षेत्र में यमुना में आया पानी का उफान
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