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Saharanpur News: बारिश से बढ़ा सर्पदंश का खतरा, झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें

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सहारनपुर। बारिश में सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं, इसलिए सांप काटने के बाद झांड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें। सीधे अस्पताल लेकर पहुंचेें। थोड़ी सी लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
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जिले में पिछले पांच दिनों से लगातार बारिश हो रही है। दो दिन से कभी बारिश तो कभी धूप भी निकल रही है। ऐसे में सांप काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। जिले में 10 जून से लेकर 12 जुलाई तक सर्पदंश से छात्रा सहित तीन की मौत हो गई। सांप के काटने से पहली मौत 10 जून को गंगोह क्षेत्र के गांव रंधेड़ी निवासी रिटायर फौजी तेजपाल की मौत हुई थी। इसके बाद एक जुलाई को गंगोह क्षेत्र के ही गांव जंधेड़ा निवासी बीएससी की छात्रा मंजू को सांप ने काटा था। चिकित्सकों को भी दिखाया, लेकिन जान नहीं बची। तीन जुलाई को रामपुर मनिहारान में देवबंद रोड निवासी 58 वर्षीय विमला की भी सर्पदंश से मौत हुई थी। सांप के काटने पर लगने वाले एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन जिला अस्पताल में पर्याप्त हैं। फिलहाल अस्पताल में 230 वॉयल मौजूद हैं। अप्रैल से जुलाई तक 73 वॉयल ही लगी हैं।
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सांप काटने के बाद ये करें
-सांप ने जिस स्थान पर काटा है, उस स्थान को बीटाडिन से साफ करें।
-शरीर में जहर न फैल जाए, इसलिए पीड़ित को तत्काल अस्पताल में भर्ती करें।
-पीड़ित व्यक्ति के शरीर से घड़ी, अंगूठी, चेन आदि उतार दें।
-मरीज को तनाव न होने दें, उसे शांत रखने की कोशिश करें।
-पीड़ित को जगाकर रखें, उसे सोने न दें।
-पीड़ित को सीधा लिटाकर रखें, शांत रखने से जहर फैलने में रुकावट होती है।

वर्जन
सर्पदंश की घटनाओं में तत्काल अस्पताल जाना चाहिए। वहां एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगवाना चाहिए। झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें। जब सांप काटता है तो जहर लोगों के शरीर में चला जाता है। खून के माध्यम से वह पूरे शरीर में फैल जाता और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
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डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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