फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Saharanpur News: नवजात में डाउन सिंड्रोम का खतरा, रहें सतर्क

विज्ञापन
विज्ञापन
विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस
विज्ञापन

-समय से बीमारी की पहचान कर चिकित्सक से कराएं इलाज
-चिकित्सक बोले-शरीर में क्रोमोसोम की असामान्य संख्या के कारण होती है बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। सामान्य बच्चों से शारीरिक और व्यवहार में अलग दिखने वाले बच्चे लाइलाज बीमारी डाउन सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। नवजात में डाउन सिंड्रोम का खतरा है तो अभिभावक सतर्क रहें। समय से बीमारी की पहचान कर चिकित्सक से इलाज कराएं। चिकित्सकों ने कहा कि यह बीमारी क्रोमोसोम की असामान्य संख्या की वजह से होती है।
विज्ञापन

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव मांगलिक के अनुसार, डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है, जिसमें किसी व्यक्ति की कोशिकाओं में एक अतिरिक्त क्रोमोसोम जुड़ जाता है। जिसे क्रोमोसोम 21 नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर प्रत्येक कोशिका में क्रोमोसोम के 23 जोड़े होते हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम जैसी जन्मजात स्थिति के साथ पैदा हुए बच्चे में क्रोमोसोम 21 अतिरिक्त होता है, जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में विलंब का कारण बनता है। एसबीडी जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जैसे बहरापन, मोतियाबिंद, कमजोर आंखें, नींद के दौरान सांस में दिक्कत और मोटापा से संबंधित परेशानी। ऐसे बच्चों में संक्रमण का भी खतरा अधिक होता है। बच्चों में एकाग्रता की कमी होती है, जिसकी वजह से उनके सीखने की क्षमता कम हो जाती है।
विज्ञापन

-
डाउन सिंड्रोम के लक्षण
-चेहरे का चपटा होना
-जीभ का ज्यादा उभार होना
-आंखों का ऊपर उठा हुआ या फिर तिरछा हुुआ दिखाई देना
-पैदा होने के साथ ही छोटी गर्दन, छोटी उंगलियां, छोटे हाथ या पैर
-बच्चों को कोई भी चीज सीखने में ज्यादा समय लगता है, जल्दी गुस्सा आ जाना, नींद न आने की समस्या
-मुंह या फिर सिर का छोटा होना
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें