उच्च शिक्षण संस्थाओं में बदलेगी शोध की परंपरा
सहारनपुर। उच्च शिक्षण संस्थाओं में होने वाले शोध की व्यवस्था बेहतर होने के साथ ही शोध की परंपरा भी बदलने जा रही है। इससे एक ओर जहां शोध कार्यों में पारदर्शिता आएगी, वहीं इनकी विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शोध को लेकर कई दिशा निर्देश महाविद्यालयों एवं निजी संस्थानों को दिए गए हैं। इसके लिए बाकायदा अनुसंधान विकास प्रकोष्ठ गठित करने को कहा गया है।
मां शाकंभरी विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि उच्च गुणवत्ता के शोध के लिए उच्च शिक्षण संस्थाओं को तैयार करने के लिए कहा गया है। अब शोध के लिए योजना बनाने के लिए शिक्षक और विद्यार्थियों को मदद की जाएगी। उन्होंने बताया कि शोध करने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक मदद के लिए या फेलोशिप से संबंधित अनेक अनुुदान योजनाएं चलती हैं, जिनका ज्यादातर विद्यार्थियों को पता ही नहीं होता है। यही वजह है कि विद्यार्थी शोध करने की सोच तक नहीं पाते हैं। लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ऐसा कहा गया है कि विभिन्न प्रकार की शोध अनुदान योजनाओं से शिक्षकों और विद्यार्थियों को अवगत कराया जाए। इसके लिए कार्यशाला आयोजित की जा सकती है। शोध के लिए स्थानीय उद्योगों और अन्य शिक्षण संस्थानों के साथ अनुबंध भी किए जा सकेंगे।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर द्विपक्षीय शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही शोध के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शोध के लिए शिक्षण संस्थाओं में अनुसंधान विकास प्रकोष्ठों का गठन किया जाना है। इसके लिए सभी महाविद्यालयों को निर्देशित किया जा चुका है।