गंगोह (सहारनपुर)। गांव खालिदपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में छठे दिन आचार्य निखिल जी महाराज ने महारास के प्रसंग को समझाते हुए कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन ही रास कहलाता है।
उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति ईश्वर की मर्जी में अपनी उन्नति समझता है, उसे परमात्मा कभी निराश नहीं होने देते। बताया कि कन्हैया जी ने कंस का वध कर राजा उग्रसेन को दोबारा से उनका राज्य वापस दिया था। प्रभु ने ज्ञान की भक्ति से बढ़कर प्रेम की शक्ति बताई है। प्रेम से मनुष्य ईश्वर को अपना बना लेता है और उनका बन जाता है। अगर इंसान परमात्मा से प्रेम करें तो परमात्मा इस कलयुग में भी हमारे प्रेम में बंध जाते हैं। प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर, प्रभु को नियम बदलते देखा भजन पर श्रद्धालु खूब झूमे। मुख्य यजमानों बृजेश देवी, रीना देवी, बेबी, सुनीता, कविता, दीपक शर्मा, सुशील, सतीश, राजवीर आदि ने पूजन कराया। महात्मा धीरानंद, कुमार पाल, आचार्य कुलदीप सरस रहे।
नगर की शिव विहार कालोनी में जारी कथा में आचार्य स्वास्तिक जी महाराज ने कहा कि इस युग में भगवान की भक्ति करना कोई कठिन कार्य नहीं है। प्रभु का स्मरण करने से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। आचार्य ने संगीतमयी चौपाइयों, जब-जब होई धर्म की हानि, बाढ़हि असुर अधम अभिमानी, तब-तब धरि प्रभु मनुज शरीरा, हरहि कृपा निज सज्जन पीरा आदि से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा में सुमन देवी, महक सिंह तंवर, अनुज तंवर, ब्रह्मपाल सिंह, जैलसिंह, सेठपाल, मुकेश गर्ग, पंकज, विरेंद्र आदि रहे।
गंगोह के गांव खालिदपुर में चल रही कथा का आनंद लेते श्रद्धालु- फोटो : SAHARANPUR