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जीवन शैली में सुधार कर स्ट्रोक से करें बचाव

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डा संजीव मिगलानी - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। अनियमित जीवन शैली, खानपान में सुधार कर ब्रेन स्ट्रोक से बचा जा सकता है। स्ट्रोक आने के बाद 60 फीसदी मरीजों की सुनने और देखने की क्षमता चली जाती है। इसके अलावा इसमें मरीज अपंग भी हो जाता है।
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इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। शहर के वरिष्ठ फिजिशियन डॉक्टर संजीव मिगलानी ने स्ट्रोक से बचाव के लिए व्यायाम, उचित खानपान का पालन करते हुए नशे से दूर रहने की सबसे ज्यादा जरूरत है। तनाव से बचने की कोशिश करनी चाहिए। स्ट्रोक (पेरालाइसिस) होने पर दिमाग की ब्लड सप्लाई बंद हो जाती है। जिसमें दिमाग की नसें या तो बंद हो जाती है या ब्रेन हेमरेज होता है। 60 से ऊपर की उम्र के लोगों में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण ब्रेन स्ट्रोक है। दिल की बीमारी वाले 20 फीसदी मरीजों को स्ट्रोक की समस्या होती है। युवाओं के लिए यह अधिक घातक होता है।
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- ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य कारण
हाई ब्लड प्रेशर
डायबिटीज
हाई कोलेस्ट्रोल
धूम्रपान
दिल की बीमारी
- ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण
शरीर के एक हिस्से में कमजोरी आना।
चलने में लड़खड़ाना।
आंखों में धुंधला होना और दो-दो दिखना।
हाथ-पैरों का सुन होना।
चेहरे का टेड़ा होना।
- स्ट्रोक मरीजों के लिए आहार
हरी सब्जियों का सेवन करना।
सप्ताह में दो बार मछली खानी चाहिए।
साबुत अनाज और दाल खाएं।
दो-तीन बार ताजे फल खाने चाहिए।
- स्ट्रोक से बचाव
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करें।
डायबिटीज को कंट्रोल करना चाहिए।
मोटापा को न बढ़ने दें।
आधे घंटे टहलना चाहिए।
बर्गर, मोमोज, चाऊमीन, पिज्जा आदि नहीं खाने चाहिए।
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