देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद और अन्य धर्मों के नेताओं के 17 प्रतिनिधिमंडल ने मौलाना महमूद मदनी की अगुवाई में मंगलवार रात केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। देश में अगले एक साल में कई राज्यों और लोकसभा चुनाव होने हैं। इसलिए इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है और इसके कई मायने भी निकाले जा रहे हैं।
मुलाकात के दौरान जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि देश के दूसरे सबसे बड़े बहुसंख्यक वर्ग को निराशा के अंधेरे में धकेलने का प्रयास किया जा रहा है। इससे आर्थिक और व्यावसायिक हानि के साथ देश की छवि भी धूमिल हो रही है। जमीयत के सचिव नियाज अहमद फारुकी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सांप्रदायिक दंगों, नफरती अभियान,समान नागरिक संहिता, मदरसों की स्वायत्तता, कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण, कश्मीर की वर्तमान स्थिति, असम में जबरन बेदखली और वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लिखित रूप में केंद्रीय गृहमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया। धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार मौलाना कलीम सिद्दीकी और उमर गौतम की जमानत का मुद्दा भी उठाया।
प्रतिनिधिमंडल में मरकजी जमीयत अहले हदीस हिंद के मौलाना असगर अली इमाम मेहंदी सलफी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारुकी, खुसरो फाउंडेशन दिल्ली के अध्यक्ष प्रोफेसर अख्तरुल वासे, जमीयत उपाध्यक्ष मौलाना सलमान बिजनौरी, दीनी तालीमी बोर्ड के महासचिव मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी आदि मौजूद रहे।