सहारनपुर। सेठ बलदेव दास बाजोरिया जिला चिकित्सालय में सारी दवाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। जिला चिकित्सालय में मरीज कई दवाएं बाहर से खरीदने को मजबूर हैं। अमर उजाला की पड़ताल में यह बात सामने आई।
जिला चिकित्सालय की ओपीडी में रोजाना एक हजार से 1500 के बीच नए-पुराने मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी में चिकित्सक बैठते हैं। इसके साथ ही सुबह आठ बजे से 11 बजे तक पैथाेलॉजी में जांच होती है। देहात क्षेत्रों से मरीज इलाज के लिए सुबह आठ बजे से पहले ही जिला चिकित्सालय में पहुंच जाते हैं। मंगलवार को अमर उजाला ने अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली दवाइयों को लेकर पड़ताल की। ओपीडी लाइन में औषधि वितरण के तीन कक्ष बने हैं। इनके बाहर मरीज ये कहते नजर आए कि ऐसे सरकारी अस्पताल का क्या फायदा, जहां बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ें। उनके पर्चे पर यदि चार दवाएं लिखी थीं तो उनमें से एक या दो दवा ऐसी थी, जो अस्पताल में नहीं थी और उसे बाहर से खरीदना पड़ा। ऐसे मरीजों को बाहर से महंगी दवाई खरीदने में जेब ढीली हो रही है।
बोले मरीज
पैर की हड्डी टूट गई थी, जिसे दिखाने के लिए जिला अस्पताल में आया हूं। यहां पर पूरी दवाएं नहीं मिल रही हैं। इलाज कराना है तो मजबूरी में बाहर से दवा खरीदनी ही पड़ेगी। ऐसे में सरकारी अस्पताल का क्या फायदा।
-शबाब, काजी का मोहल्ला
बच्चे को दिखाने के लिए अस्पताल आया हूं। चिकित्सक ने बुखार और खांसी की दवा लिखी, लेकिन दवाई पर्चे पर लिखी थी, उनमें से एक दवा अस्पताल के औषधि वितरण केंद्र से नहीं मिली। इसके बाद बाहर से दवा खरीदनी पड़ी।
जुबैर, गागलहेड़ी
बच्चे को कई दिन से दस्त की शिकायत थी। वह मंगलवार को जिला अस्पताल लेकर पहुंचा और चिकित्सक ने देखने के बाद दवा लिख दी। जब वह औषधि वितरण केंद्र पर पहुंचा तो वहां पर पर्चे की सारी दवा नहीं मिली। मजबूर होकर बाहर मेडिकल स्टोर से दवा लेनी पड़ी।
नवाब, मानकमऊ
कई दिनों से त्वचा रोग की समस्या आ रही थी। इसलिए जिला अस्पताल में चिकित्सक को दिखाने के लिए आया हूूं। यहां कुछ दवाएं तो मिल गईं, बाकी कुछ दवाएं नहीं होने पर बाहर से खरीदनी पड़ी है। ऐसे में सरकारी अस्पताल का क्या फायदा, जहां पर सारी दवाएं नहीं मिलती हैं।
रामेश्वर, गोविंद नगर
ऐसा है तो जांच कराई जाएगी
- जिला चिकित्सालय पर्याप्त दवाइयां हैं। जैसे ही दवाएं खत्म होने के कगार पर पहुंचती हैं उनकी डिमांड तुरंत भेज दी जाती है। हां उनके आने में देर हो जाती है। डॉक्टरों को भी वो ही दवा लिखने को कहा गया है, जो अस्पताल में है। इसके बाद भी मरीज बाहर से दवाएं खरीद रहे हैं तो उसकी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, प्रमुख अधीक्षक जिला चिकित्सालय