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Saharanpur News: जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा पांडवकालीन शाकेश्वर महादेव मंदिर

Wed, 28 Feb 2024 01:43 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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शिवालिक पहाड़ियों के बीच ​स्थित शाकेश्वेर महादेव मंदिर। संवाद
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शाकंभरी। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी परिक्षेत्र में शिवालिक पहाड़ियों के मध्य स्थित पांडवकालीन शाकेश्वर महादेव मंदिर जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है। अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इसका निर्माण किया था। मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। कुछ समय पहले मंदिर के जीर्णोद्धार का काम शुरू भी हुआ था, लेकिन धन की कमी के कारण यह काम बीच में रुक गया है, जिसे अब मदद की दरकार है।
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सिद्धपीठ के आसपास पंच महादेव मंदिर स्थापित हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पांचों पांडवों ने अलग-अलग स्थान पर भगवान शिव की तपस्या की थी। इनमें गदाधारी भीम ने जिस स्थान पर तपस्या की थी वहां उन्होंने शाकेश्वर मंदिर स्थापित किया था। यह दक्षिण मुहाना मंदिर शाकंभरी मंदिर से पूर्व दिशा में मात्र आधा किमी दूर स्थित है। बताया जाता है कि कई साल पहले यहां संत शाकंभरी गिरी जी महाराज आए थे और उन्होंने ही मंदिर की खोज कर यहां पूजा अर्चना शुरू की थी। जब उन्हें पानी की आवश्यकता हुई तो कुएं का निर्माण कार्य शुरू किया। खोदाई के दौरान एक शिला(पत्थर) का अवरोध आने से कार्य रुक गया था। इस पर संत ने भगवान शिव की तपस्या की। मान्यता है कि शिवजी ने रात्रि में दर्शन देकर कहा था कि शिला में एक छेद कर दो पानी की कमी नहीं रहेगी। सुबह ही उस शिला में छेद कर दिया गया, जिसमें से स्वच्छ जल की अविरल धारा निकल पड़ी जो अब तक श्रद्धालुओं की प्यास बुझा रही है। इस कुएं की गहराई मात्र 45 फीट है।
मंदिर परिसर में संतों की समाधियां भी स्थित हैं। मंदिर में प्रत्येक माह की दो तारीख को भंडारा भी आयोजित किया जाता है। कई माह पूर्व मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया था। इसमें टीन शेड एवं गर्भगृह का निर्माण कार्य चल रहा था, जो धन के अभाव में फिलहाल रुक गया है। मंदिर की देखरेख राकेश्वर गिरी महाराज एवं जगदीप भंडारी कर रहे हैं। मुख्य पुजारी कमलगिरी जी महाराज वर्तमान में पुरा महादेव (बागपत) में निवास करते हैं।
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सिद्धपीठ में हैं पंच महादेव मंदिर

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यहां पास में ही स्थित पंच महादेव में मटकेश्वर महादेव पर अर्जुन, बड़केश्वर महादेव पर युधिष्ठर, इंद्रेश्वर महादेव पर नकुल और कमलेश्वर महादेव पर सहदेव ने तपस्या की थी। ऐसा भी उल्लेख है कि पांडवों द्वारा एक पूरा इंद्र शहर बसाया गया था। सहंश्रा ठाकुर मंदिर क्षेत्र में मिलने वाली विभिन्न आकृति खुदी शिलाएं इस बात को प्रमाणित करती हैं कि वास्तव में पूर्व में यहां पर कोई शहर और मंदिरों की श्रंखलाएं स्थापित थीं।
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