सहारनपुर। जनपद के कई आम के बागों में शाखा गांठ कीट (शूटगाल मेकर) का प्रकोप दिखाई दे रहा है। समय पर उपाय नहीं करने पर इसके कीट आम की कोमल पत्तियों का रस चूसकर काफी नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे आम की प्रभावित शाखा की वानस्पतिक वृद्धि रुक जाती है।
औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉक्टर बीपी राम ने बताया कि आम के शाखा गांठ कीट को ततैया कीट के नाम से भी जाना जाता है। इस कीट का प्रकोप जनपद सहारनपुर एवं मुजफ्फरनगर में आम के बागों में भी देखा जा रहा है। इस कीट की मादा मार्च एवं अप्रैल में पत्तियों के मध्य अंडे देती है। जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में इस कीट के अंडों से शिशु कीट निकलकर आम की नई कलिकाओं से रस चूसते हैं। इसके साथ ही यह कीट एक प्रकार का स्राव छोड़ते हैं, जिसके कारण आम की कलिका गुलाब की कली की तरह नोकदार रूप में परिवर्तित हो जाती है। जिससे शाखा की वानस्पतिक वृद्धि रुक जाती है और प्रभावित पौधों की शाखाओं पर बौर नहीं आता। उन्होंने कहा कि इस कीट की रोकथाम दो चरणों में करनी चाहिए। प्रथम चरण में कीट के अंडों को समाप्त करने के लिए 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच प्रॉफेनोफॉस का पानी का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। द्वितीय चरण का पहला छिड़काव जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के प्रथम सप्ताह के बीच करना चाहिए। इसमें क्यूनालफॉस 25 ईसी की दो मिलीलीटर या मोनोक्रोटोफॉस 36 ईसी दो मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना मुफीद रहता है। इसके आठ दस दिन बाद थायोमिथाक्साम एक ग्राम प्रति तीन लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इसके 10-15 दिन बाद तीसरा छिड़काव करें। इसमें डाएमेथोएट 30 ईसी दो मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।