सहारनपुर। गन्ने की फसल में पोक्का बोईंग रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इस रोग में सबसे पहले गन्ने के अगोले में सिकुडन के साथ सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। संक्रमण बढ़ने पर पत्तियां मुरझाकर काली पड़ जाती है। समय पर उपचार नहीं किया गया तो रोगग्रस्त फसल की वृद्धि रुक जाती है जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।
पोक्का बोईंग रोग गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुंचाता है। रोग की शुरुआत में गन्ने की अगोले की पत्तियों पर सिकुड़न के साथ सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। इसका संक्रमण बढ़ने पर पत्तियां मुरझाकर काली पड़ जाती हैं और पत्ती का ऊपरी भाग सड़कर गिर जाता है। इससे फसल की बढ़वार रुक जाती है। इस रोग से गन्ने के ऊपर की सारी पत्तियां सड़कर गिर जाती हैं और ऊपरी हिस्सा नुकीला हो जाता है। प्रभावित गन्ने की ऊपर की पोरियां छोटी रह जाती है और उन पर लंबाई में कटने के निशान हो जाते हैं। प्रभावित फसल की उत्पादकता में काफी कमी आती है।
उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह ने बताया कि इस रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर किसान कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 0.2 प्रतिशत (100 लीटर पानी में 200 ग्राम दवाई) की दर से या कारर्बेंडाजिम दवाई 0.1 प्रतिशत (100 लीटर पानी में 100 ग्राम दवाई) की दर से 15 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करें। उन्होंने मंडल के सभी ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षकों, गन्ना सुपरवाइजरों और चीनी मिलों के गन्ना विशेषज्ञों को पोक्का बोईंग रोग से बचाव के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए गांव-गांव में चौपाल लगाई जाए।