सहारनपुर। उच्च शिक्षण संस्थाओं में व्यवस्था बेहाल है। ऐसे में उक्त संस्थाओं से शिक्षित बनकर अपने उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद करना बेमानी है। दरअसल, सहायता प्राप्त यानी एडेड महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। इसी से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि शिक्षक ही नहीं होंगे तो शिक्षा का स्तर क्या होगा।
जेवी जैन कॉलेज जनपद का प्रतिष्ठित एवं सबसे बड़े महाविद्यालयों में से एक है, लेकिन यहां शिक्षकों की भारी कमी है। यहां स्थायी शिक्षकों के करीब 104 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से मात्र 33 ही शिक्षक कार्यरत हैं। इसके अलावा 11 शिक्षक मानदेय पर रखे गए हैं, जबकि महाविद्यालय के तमाम पाठ्यक्रमों की सीटों की संख्या करीब 5,500 है। इस स्थिति में एक शिक्षक पर करीब 120 विद्यार्थी आते हैं, जबकि नियमानुसार 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए। शिक्षकों की बाकी कमी को पूरा करने के लिए कॉलेज प्रशासन प्रत्येक वर्ष करीब 40 अस्थायी शिक्षकों की तैनाती करता है, जो कुछ समय के लिए रखे जाते हैं। इसके बावजद शिक्षकों की संख्या पूरी नहीं होती है। कई विषय ऐसे हैं, जिनके पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है।
स्नातक और स्नातकोत्तर में कई पाठ्यक्रम
जेवी जैन कॉलेज में स्नातक स्तर पर बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड और एलएलबी पाठ्यक्रम संचालित हैं। स्नातकोत्तर स्तर पर 12 विषयों में एमए, कई विषयों में एमएससी और एमकॉम की पढ़ाई होती है। इन सभी पाठ्यक्रमों में कुल सीटें करीब 5,500 हैं।
यहां आती है समस्या
महाविद्यालयों की तमाम व्यवस्थाएं चलाने के लिए विभिन्न तरह की समितियां बनी होती हैं। जैसे प्रॉक्टोरियल बोर्ड, परीक्षा समिति आदि। इनका गठन करने में शिक्षकों की कमी आड़े आती है। ऐसी स्थिति में कॉलेज प्रशासन जुगाड़ व्यवस्था अपनाता है।
महाविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी है, जिसे दूर करने के लिए अंशकालिक शिक्षक रखे जाते हैं, लेकिन उसके बावजूद समस्या रहती है, लेकिन प्रयास यही रहता है कि जो भी संसाधन हमारे पास हैं उनका अधिक से अधिक उपयोग किया जा सके। जिससे की शिक्षण कार्य प्रभावित न हो।
- प्रो. हरिओम गुप्ता, कार्यवाहक प्राचार्य, जेवी जैन कॉलेज।