देवबंद। रोजा क्या है, रोजेदार को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए और इसकी कितनी अहमियत है। इन तमाम बातों पर रोशनी डालते हुए फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि रमजान का महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास होता है। जिसमें अल्लाह ताआला अपने बंदों पर रहमतें और बरकतें नाजिल फरमाता है, लेकिन इसमें यह याद रखने वाली बात है कि बुराइयों से न रुकने वाले को रोजा, रोजा नहीं बल्कि फाका होगा।
रमजान माह की फजीलतों पर रोशनी डालते हुए मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि रमजान मुबारक महीना है और अल्लाह ने रमजान के रोजे फर्ज किए हैं। जिनका बहुत सवाब है। नमाज, हज, जकात के साथ रोजा भी अहम फर्ज है। जिसे हर सेहतमंद, अक्लमंद और बालिग मुसलमान के लिए रखना लाजिमी है। इस माह की बहुत बरकतें हैं जो अल्लाह अपने बंदों को अता करता है। उन्होंने कहा कि रोजा नाम है सुबह से शाम तक खाने पीने से परहेज करने, भूख प्यास बर्दाश्त करने, झूठ न बोलने, धोखा न देने, गाली न देने, गुस्सा और बेइमानी न करने आदि का। जो आदमी सुबह से शाम तक भूखा रहे, लेकिन झूठ बोलना न छोड़े, और वो बुरे काम करता रहे, नमाज न पढ़े तो उसका रोजा-रोजा नहीं बल्कि फाका है जो अल्लाह को पसंद नहीं है। मौलाना अरशद फारुकी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी ऐसी मजबूरी की वजह से रोजा नहीं रख पा रहा है जिसकी इजाजत शरीयत में दी हुई है, तो ऐसे आदमी को चाहिए कि वह खुलेआम खाना पीना न करे, रोजेदारों का अहतराम (इज्जत) करे। जो आदमी जानबूझकर रोजा नहीं रखता वो बड़ा गुनहगार है। उसको या तो लगातार 60 रोजे रखने होंगे या फिर 60 आदमियों को खाना खिलाना होगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई मजबूरी में रोजा छोड़ता है तो रमजान के बाद उसे छोड़े हुए रोजे रखने होंगे।