सहारनपुर। संस्थागत प्रसव को शासन बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की योजनाएं चला रहा है। वहीं जिला महिला अस्पताल में भी व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त हुई हैं, लेकिन यहां संस्थागत प्रसव में वर्ष 2021 के मुकाबले कमी आई है। हालांकि अभी तीन महीने शेष है। वहीं, प्रसव के दौरान नवजात बच्चों की मौत का आंकड़ा घटा है।
गर्भवती को अस्पताल तक लाने और प्रसूता को घर तक छोड़ने के लिए 102 एंबुलेंस, पहली बार प्रसव होने पर पांच हजार रुपये प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत और जननी सुरक्षा योजना के तहत भी धनराशि दी जाती है। इस सबके बाद भी संस्थागत प्रसव को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। इसकी तस्दीक जिला महिला अस्पताल के आंकड़े कर रहे हैं। यहां वर्ष 2021 में 7,537 प्रसव हुए। इसमें 3,116 प्रसव ऑपरेशन और 4,421 प्रसव सामान्य हुए। जबकि वर्ष 2022 में दिसंबर तक जिला महिला अस्पताल में प्रसव की संख्या 4,753 रह गई है। इसमें 1,613 ऑपरेशन से और 3,140 सामान्य प्रसव हुए हैं। हालांकि जनवरी, फरवरी और मार्च अभी बाकी है। वर्ष 2021 में जहां प्रसव के दौरान 227 नवजातों की मौत हुई थी, वहीं 2022 दिसंबर तक 111 नवजातों की मृत्यु हुई है।
वर्ष 2021
संस्थागत प्रसव 7537
ऑपरेशन 3116
सामान्य - 4421
पैदा हुए बच्चे - 7400
बालक - 3927
बालिका - 3473
मृत नवजात 227
वर्ष 2022 (दिसंबर तक)
संस्थागत प्रसव 4753
ऑपरेशन 1613
सामान्य - 3140
पैदा हुए बच्चे - 4692
बालक - 2401
बालिका - 2291
मृत नवजात 111
महिला अस्पताल में आने वाली महिलाओं को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराने की सुविधा हो गई है, इसलिए महिलाएं अपने नजदीक की सीएचसी-पीएचसी पर पहुंच जाती है। जिस वजह से महिलाएं अस्पताल नहीं आती है।
- डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल