सहारनपुर। जीवनशैली में सामान्य से अधिक आरामदायक बनना और गलत तरीके से जोड़ों की गतिविधियां करना गठिया का कारण बन रहा है। अब बुुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा भी गठिया रोग के शिकार हो रहे हैं। एसबीडी जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 175 ओपीडी में 15 फीसदी मरीज गठिया की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सक के अनुसार, जीवनशैली को संतुलित बनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
बृहस्पतिवार यानी आज विश्व गठिया दिवस मनाया जाएगा। गठिया का सबसे अधिक प्रभाव घुटनों में और उसके बाद कूल्हे की हड्डियों पर पड़ता है। इससे बदन में दर्द और अकड़न महसूस होने लगती है। कभी-कभी उनके हाथों, कंधों और घुटने में सूजन और दर्द रहता है। ऐसे लोगों को अर्थराइटिस की समस्या हो सकती है।
एसबीडी जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. धर्मराज मनु ने बताया कि अर्थराइटिस जोड़ों की सूजन है। 10 फीसदी से अधिक गठिया से लोग परेशान हो रहे हैं। सामान्य स्थिति में आस्टियो अर्थराइटिस 50 साल की उम्र के बाद होता है। यह शरीर पर निर्भर करता है कि जोड़ों को कितना और किस तरह से इस्तेमाल किया गया है। अर्थराइटिस के लक्षण आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ विकसित होते हैं, लेकिन यह अचानक भी समस्या बन सकते हैं।
इसके अलावा गलत तरीके से अधिक देर तक झुककर काम करना, सिर पर नियमित तौर पर वजन उठाना, झुककर कोई वजन उठाना, कंप्यूटर के सामने गलत तरीके से घंटों बैठे रहना, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करना, गर्दन झुकाकर घंटों काम करने से भी गठिया की शिकायत होती है।
ऐसे करें बचाव
- रोजाना संतुलित आहार लें।
- जंक फूड से तौबा करें, रोजाना सैर करें।
- धूम्रपान और शराब का सेवन न करें, यह हड्डियों को कमजोर बनाता है।
- साइकिलिंग से हड्डियों को मजबूत बनाएं।