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लंपी बीमारी से नौ गायों की मौत, 1800 से ज्यादा बीमार

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लंपी बिमारी से ग्रसित गाय - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। जिले में लंपी से ग्रसित पशुओं का आंकड़ा 1800 के पार पहुंच गया है। इनमें से नौ गायों की मौत भी हुई है। पशुओं के संक्त्रस्मित होने से दूध उत्पादन पर विपरीत असर पड़ रहा है। लगातार बढ़ रहे संक्त्रस्मण से पशु पालकों में दहशत का माहौल बना है।
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विकासखंड साढ़ौली कदीम के गांव रसूलपुर, चको, अलीपुरा, कवादपुर सहित कई गांवों में गोवंश में रोग फैला है। पशुपालक इसरान, भूरा, मेहरबान, सतीश, रामकुमार, नवीन, योगेंद्र ने बताया बीमारी की चपेट में आने से नौ गायों की मौत भी हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पशुपालन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची है। इसी तरह नानौता क्षेत्र के गांव टिकरौल व बुंदूगढ़ में गायों में लंपी वायरस फैलने से पशुपालकों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि, पशुपालन विभाग की टीम की ओर से यहां बीमार गोवंश को दवाएं दी जा रही हैं। इसी तरह तीतरों क्षेत्र के गांव रादौर, महंगी व बेरखेड़ी में दर्जन भर पशुपालकों के मवेशी इस वायरस की चपेट में हैं। पशु पालक कंवरपाल सिंह, ईश्वरपाल, धीरेंद्र, डॉ. योगेश, राजपाल, पहल सिंह, नाथी, प्रवीण कौशिक, लखपतराय सैनी का कहना है कि तेजी से गोवंश में संक्त्रस्मण फैल रहा है, लेकिन इनको इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में पशु पालकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बीमारी की वजह से गाय के दूध उत्पादन की क्षमता पर भी असर पड़ा है। इसके अलावा चिलकाना क्षेत्र के गांव चौरीमंडी, दुमझेड़ा, नल्हेड़ा, पठेड़ टोडरपुर, आल्हणपुर, धौलाहेड़ी, दानतपुर, घोड़ोपीपली, अहाड़ी, पांजबांगर, बुड्ढाखेड़ा, सुल्तानपुर, दूधगढ़, दौलतपुर, नथमलपुर में भी बड़ी संख्या में गोवंश लंपी रोग की चपेट में हैं। कुछ गोवंश जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजीव सक्सेना का कहना है कि बीते पांच दिनों में जिले में नौ गोवंश की मौत होने की जानकारी सामने आई है, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण सही तरह पता लग पाएंगे। अभी माना जा रहा है कि लंपी बीमारी से गोवंश की जान गई है। अभी तक जिले में करीब 1800 गोवंश में बीमारी के लक्षण मिले हैं।
प्रत्येक गांवों भेजी जा रहीं टीमें, 40 सैंपल भेजे
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजीव सक्सेना कहना है कि बीमारी से बचाव के लिए प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर टीमों का गठन कर दिया गया है। गांव-गांव में विभाग की टीमें जा रही हैं, जो बीमार गोवंश को दवाएं देकर इलाज कर रही हैं। इस बीमारी से बचाव को वैक्सीन बन गई है, लेकिन जिसका ट्रायल चल रहा है। अभी विभाग को वैक्सीन नहीं मिली है।
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क्या है लंपी त्वचा रोग
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के अनुसार लंपी कैपरी पॉक्स वायरस द्वारा होती है। यह मक्खियों व मच्छरों के काटने से फैलती है। इस बीमारी में शुरू में दो-तीन दिन तक बुखार आता है तथा बाद में शरीर में सारी चमड़ी के ऊपर 2 से 5 सेंटीमीटर तक की गांठें बन जाती हैं। यह गांठें गोल व उभरी हुई होती हैं। गांठें कभी-कभी मुंह में तथा सांस नली में भी हो जाती है। इस बीमारी में पशु कमजोर हो जाता और पैरों पर सूजन आ जाती है, साथ ही दूध उत्पादकता कम हो जाती है। सही समय पर इलाज मिलने पर पशु दो से तीन सप्ताह के अंदर ठीक हो जाता है।
ऐसे करें बचाव
- बीमारी से ग्रस्त पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें।
- मक्खियों, मच्छरों व चिड़ियों को नियंत्रित करने के लिए दवा का छिड़काव कराएं।
- पशु मेला व पशु मंडियों के आयोजन को बंद करें।
- पशुबाड़ों में सफाई का विशेष ध्यान रखना जाए।
- पशुबाड़ों की सफाई के लिए क्लोरोफॉर्म, फार्मेलिन, फिनॉल व सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसे रासायनों का प्रयोग करें।

लंपी बिमारी से ग्रसित गाय की जांच करते पशु चिकित्सक- फोटो : SAHARANPUR

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