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राम मंदिरआंदोलन: जय श्रीराम के जयघोष लगाने पर नवदंपती को जाना पड़ा था जेल, कारागार में किया कीर्तन

Sat, 06 Jan 2024 04:50 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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दंपती - फोटो : Amar Ujala
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अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा को लेकर सनातन धर्म को मानने वालों में भारी उत्साह है। श्री राम मंदिर आंदोलन के लिए सहारनपुर जनपद के में बड़ी संख्या में लोगों ने संघर्ष किया। इसी आंदोलन से जुड़े सहारनपुर के एक नवदंपती को शादी के दस दिन बाद ही जेल में जाना पड़ गया था।
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शहर के माधवनगर निवासी वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सभासद 64 वर्षीय महेंद्र सचदेवा श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे। उनकी दस अक्तूबर 1992 को सुषमा सचदेवा से शादी हुई थी। उन दिनाें राम मंदिर आंदोलन पूरे जोर शोर से चल रहा था।

शादी के दस दिन बाद महेंद्र सचदेवा और सुषमा सचदेवा घंटाघर पर वीनस टॉकीज मार्केट में स्थित मेडिकल स्टोर पर दवा लेने गए थे। शाम का समय था। घंटाघर उस समय छावनी में तब्दील था। पुलिस और पीएसी के जवान तैनात थे। पुलिस राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगाें को ढूंढ रही थी। लोगों में दहशत का माहौल था।
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घंटाघर पर एक सीओ माइक पर बोल रहे थे कि है कोई जयघोष करने वाला तो सामने आए। यह देखकर महेंद्र सचदेवा से रुका नहीं गया। उन्होंने अपने भाई राजेश सचदेवा को सूचना देकर घंटाघर पर बुलाया और स्कूटर की चॉबी पत्नी को दी।

उन्होंने पत्नी से कहा कि आप भाई के साथ घर चली जाएं। मैं सीओ की बात का जवाब देकर आता हूं। तब, सुषमा सचदेवा ने भी घर जाने से मना दिया। इसके बाद नवदंपती ने घंटाघर पर जय श्रीराम का जोर शोर से जय घोष किया। यह सुनते ही पुलिस ने इन्हें घेर लिया।

सीओ और महेंद्र सचदेवा के बीच हाथापाई हो गई। सीओ हाथ पकड़कर महेंद्र सचदेवा को जीप में बैठाने लगा। दूसरी तरफ सुषमा सचदेवा पति का दूसरा हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचती रहीं और जयश्रीराम के जयकारे लगाती रहीं। कुछ देर के लिए इनकी पुलिसकर्मियों से नोकझोंक हुई। इसके बाद महेंद्र सचदेवा और उनकी पत्नी ने गिरफ्तारी दी। तब, नवदंपती को जेल में बंद कर दिया गया। इसके बाद तीन दिन में सुषमा सचदेवा को छोड़ दिया और महेंद्र सचदेवा दस दिन बाद जेल से बाहर आए थे।

जेल में किया कीर्तन
महेंद्र सचदेवा ने बताया कि वह जब पत्नी के साथ जेल गए तो राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई लोग बंद थे। मंदिर में रोजाना भगवान श्रीराम के भजनाें का कीर्तन होता था। इसके बाद जगह-जगह राममंदिर आंदोलन तेज हो गया था।
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