घंटाघर पर एक सीओ माइक पर बोल रहे थे कि है कोई जयघोष करने वाला तो सामने आए। यह देखकर महेंद्र सचदेवा से रुका नहीं गया। उन्होंने अपने भाई राजेश सचदेवा को सूचना देकर घंटाघर पर बुलाया और स्कूटर की चॉबी पत्नी को दी।
उन्होंने पत्नी से कहा कि आप भाई के साथ घर चली जाएं। मैं सीओ की बात का जवाब देकर आता हूं। तब, सुषमा सचदेवा ने भी घर जाने से मना दिया। इसके बाद नवदंपती ने घंटाघर पर जय श्रीराम का जोर शोर से जय घोष किया। यह सुनते ही पुलिस ने इन्हें घेर लिया।
सीओ और महेंद्र सचदेवा के बीच हाथापाई हो गई। सीओ हाथ पकड़कर महेंद्र सचदेवा को जीप में बैठाने लगा। दूसरी तरफ सुषमा सचदेवा पति का दूसरा हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचती रहीं और जयश्रीराम के जयकारे लगाती रहीं। कुछ देर के लिए इनकी पुलिसकर्मियों से नोकझोंक हुई। इसके बाद महेंद्र सचदेवा और उनकी पत्नी ने गिरफ्तारी दी। तब, नवदंपती को जेल में बंद कर दिया गया। इसके बाद तीन दिन में सुषमा सचदेवा को छोड़ दिया और महेंद्र सचदेवा दस दिन बाद जेल से बाहर आए थे।
जेल में किया कीर्तन
महेंद्र सचदेवा ने बताया कि वह जब पत्नी के साथ जेल गए तो राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई लोग बंद थे। मंदिर में रोजाना भगवान श्रीराम के भजनाें का कीर्तन होता था। इसके बाद जगह-जगह राममंदिर आंदोलन तेज हो गया था।