छुटमलपुर। परिवार के सात सदस्यों को खोने वाले महेंद्र सैनी हादसे के बाद से गुमसुम है। ग्रामीण उन्हें सांत्वना देने आ रहे थे, लेकिन वे जैसे शून्य में देख रहे थे। लोगों ने ढांढस बंधाया तो सिसक पड़े। काफी देर तक रोते रहे फिर बोले मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई है, जिस वक्त घर से पत्नी, बेटा, बेटी और मासूम नाती निकले थे सपने में भी नहीं सोचा था कि वह उन्हें आखिरी बार देख रहे हैं। हम उम्र साले की मौत से पहले ही दुखी थे कि कुदरत ने ऐसा जख्म दे दिया जो आखिरी सांस तक नहीं भरेगा। बेटी दामाद दोनों असमय चले गए अब बचे नाती अभिनन्दन का क्या होगा। वह तो पांच साल का ही है। बिन मां बाप का बच्चा कैसे पलेगा। उसे तो पता भी नहीं होगा कि उसके मां बाप दोनों ही चल बसे हैं।