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Saharanpur News: मशरूम की खेती ने दिखाई नई राह, आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं

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कमा रही अच्छा मुनाफा, कम्पोस्ट भी तैयार कर रही
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फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। मशरूम की खेती जनपद की कई महिलाओं को तरक्की की राह दिखा रही है। महिलाएं वर्ष भर मशरूम का उत्पादन ले रही हैं। इससे वे अच्छा मुनाफा कमाकर आत्मनिर्भर हो गई हैं। साथ ही कई महिलाएं मशरूम की खेती के लिए कम्पोस्ट तैयार कर उत्पादकों को इसकी बिक्री कर रही हैं।
जनपद में वर्ष भर मशरूम की खेती होती है। मिल्की मशरूम की खेती के लिए उपयुक्त समय जून महीने से सितंबर माह है। बटन मशरूम के लिए अक्तूबर से मार्च और ढिंगरी या ऑस्टर मशरूम की खेती फरवरी से मई तक होती है। जनपद की कई महिलाएं मशरूम की खेती कर आत्मनिर्भर बनी हैं। बिहारीगढ़ में मशरूम की खेती कर रही प्रियंका सिंह ने वर्ष 2016 में एक लाख रुपये की लागत से मशरूम की खेती शुरू की थी। अब वे प्रतिदिन मशरूम का पांच से छह क्विंटल उत्पादन ले रही हैं। इसके साथ ही वे कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर मशरूम के लिए आवश्यक कम्पोस्ट को तैयार कर बेच रही हैं। इससे उन्हें बढि़या आय प्राप्त हो रही हैं। इनके अलावा मुर्तजापुर की पूजा और फतेहपुर कलां की किरण आदि महिलाएं मशरूम की अच्छी खेती कर आत्मनिर्भर हो रही हैं।
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बोली महिला उत्पादक
मशरूम की खेती से न सिर्फ महिलाओं को स्वरोजगार मिल रहा है बल्कि अच्छी आय प्राप्त कर आत्मनिर्भर भी हो रही हैं। 25 हजार बैग से प्रतिदिन पांच से छह क्विंटल बटन मशरूम का उत्पादन हो रहा है। जिसे देहरादून, रुड़की और सहारनपुर की मंडी में बेचा जा रहा है। इसका औसतन 110 रुपये प्रति किलो का भाव प्राप्त हो रहा है। इसके अलावा कम्पोस्ट तैयार कर मशरूम उत्पादकों को बेचा जा रहा है - प्रियंका सिंह मशरूम उत्पादक, बिहारीगढ़
आचार, मुरब्बा, पापड़ और पाउडर भी बना रहे
वर्ष 2019 से मशरूम की खेती शुरू की। मशरूम को न सिर्फ बाजार में बेचा जा रहा है बल्कि प्रसंस्करण कर इसके उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे आचार, मुरब्बा, पापड़ और पाउडर बनाकर बाजार में बेचा जा रहा है। इस बार करीब दो हजार बैग में बटन मशरूम लगा रखी है। इससे प्रतिमाह 25 से 28 क्विंटल मशरूम का उत्पादन मिल रहा है। बाजार में इसका भाव 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है। - पूजा, मशरूम उत्पादक, गांव मुर्तजापुर
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जनपद की कई महिलाएं मशरूम की खेती कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। इनमें से कई मशरूम से पापड़, मुरब्बा, अचार आदि उत्पाद भी बना रही हैं। मशरूम की खेती में लागत कम और आय अच्छी प्राप्त होती है। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा मशरूम की खेती के लिए प्रोत्साहित करने साथ ही प्रशिक्षण दिया जाता है। - डॉक्टर आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र
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