सहारनपुर। नगर निगम की ओर से ऑडिट विभाग को उपलब्ध कराए गए वाहनों में डीजल खर्च के आंकड़े बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रहे हैं। मात्र नौ वाहनों में खर्च हुए डीजल में 17 लाख रुपये का अतिरिक्त तेल खर्च होना पाया गया है। इन वाहनों में 23,362 लीटर डीजल खर्च होना था, जबकि 42,401 लीटर डीजल खपा दिया गया। 70 से अधिक वाहनों के डीजल खर्च का ऑडिट बाकी है।
नगर निगम के गैराज विभाग द्वारा महानगर की सीमा के भीतर सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के डीजल खर्च के ऑडिट को लेकर ऑडिट विभाग द्वारा गैराज विभाग से वाहनों की लॉगबुक और जीपीएस विवरण मांगा जा रहा है। 66 वाहनों की मौजूदा लॉगबुक उपलब्ध कराई गई, जिनमें से 61 लॉगबुक बिना ऑडिट किए वापस ले ली गईं। बार-बार पत्र लिखने के बाद नौ वाहनों की लॉगबुक और जीपीएस का विवरण उपलब्ध कराया गया है।
इनमें एक अप्रैल 2023 से 22 अप्रैल 2024 तक के डीजल खर्च का ऑडिट किया गया है। इनमें घंटों के चलने के हिसाब से अधिकतम 23,362 लीटर डीजल दिया जाना था, लेकिन उक्त वाहनों को 42,401 लीटर डीजल दिया गया, जो अधिकतम मानक से 19,039 लीटर अधिक है। इसकी कीमत करीब 17 लाख रुपये है। केवल नौ वाहनों के डीजल खर्च में एक साल में 17 लाख रुपये के अंतर बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।
- 72 वाहनों के जीपीएस का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया
ऑडिट विभाग को जीपीएस अभिलेखों के अलावा 72 वाहनों में लगे जीपीएस का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके अलावा बड़ी पोकलेन मशीन भी चलाई जा रही है, जिसे वित्तीय वर्ष एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक स्टॉक बुक के अनुसार 26,394 लीटर डीजल जारी किया गया। इसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है।
- नौ वाहनों का डीजल खर्च
वाहन का नाम घंटे चली डीजल खर्च/घंटा खर्च होना था खर्च दिखाया अतिरिक्त खर्च
बड़ी पोकलेन-1-992.42-8.10-8038-21,09713,059
बड़ी पोकलेन-2-122.45-8.10-991.801554-562
छोटी पोकलेन-1-513.21-4.50-2309-3278-969
छोटी पोकलेन-3-280.21-4.50-1260.901448187
छोटी पोकलेन-5-482.91-4.50-2173-2535362
रोबोट-1-617.47-4.50-2778.6040381259
रोबोट-2-589.17-4.50-2651.203519867
रोबोट-3-657.30-4.50-2957.804679-1721
रोबोट-4-44.354.50-199.50-25353
वाहनों में डीजल खर्च जीपीएस के विवरण से मेल नहीं खा रहा है। इस संबंध में आख्या उपलब्ध कराने को कहा गया था। फिलहाल अवकाश पर चल रहा हूं। लौटने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। - सच्चिदानंद त्रिपाठी, मुख्य नगर लेखा परीक्षक, नगर निगम।