सहारनपुर। नगर निगम में वर्ष 2014 के बाद से कर निर्धारण सूची नहीं बनाई गई है। वर्तमान में मूल अभिलेख न रखकर, केवल कंप्यूटर में उल्लिखित प्रविष्टियों के आधार पर नकल जारी की जा रही है, जबकि कोई भी नकल मूल अभिलेख की सत्य प्रतिलिपि होती है।
नगर निगम में वर्ष 2014 से कर निर्धारण सूची का कोई मूल अभिलेख भी नहीं है। ऐसे में प्रतिलिपि का प्रमाणीकरण भ्रामक है। यह सब बातें मुख्य नगर लेखा परीक्षक (एमएनएलपी) सच्चिदानंद ने उस पत्र में लिखी हैं, जो उन्होंने नगरायुक्त संजय चौहान को लिखा है।
मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने पत्र के माध्यम से बताया कि कर अनुभाग में गंभीर अनियमितताएं हैं। कर विभाग के अभिलेखों की संपरीक्षा के लिए लगातार पत्राचार किए जाते रहे हैं, लेकिन विभाग द्वारा कर निर्धारण से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं। वर्ष 2014 के बाद से कर निर्धारण सूची नहीं बनाने से लेकर अभी तक चली आ रही पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, साथ ही कर विभाग में जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है उस पर भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा है कि मौजूदा सॉफ्टवेयर केवल चालू वर्ष की प्रविष्टियों को ही प्रदर्शित कर सकता है। बीते वर्षों में किन तिथियों में करदाता द्वारा कर जमा किया गया, एआरवी कब-कब परिवर्तित हुई या नामांतरण कब एवं किस आदेश से किया गया।
ऐसी कोई सूचना वर्तमान सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्राप्त नहीं होती है। प्रमाणिक कर निर्धारण सूची न रखा जाना एवं अक्षम सॉफ्टवेयर अपनाया जाना षड्यंत्र की ओर इशारा करता है।