सहारनपुर में विधान परिषद चुनाव में एक बार फिर केंद्र की सत्ताधारी भाजपा और प्रदेश में सत्तासीन सपा में गुटबाजी और भितरघात सामने आ गई। भले ही बसपा की औपचारिक जीत की घोषणा मतगणना के बाद हुई है, मगर भाजपाई और सपाइयों ने पहले से ही हार मान ली थी। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे चुनाव के दौरान दोनों ही पार्टी के नेेता निष्क्रिय ही रहे। इतना ही नहीं मतगणना स्थल पर भाजपा और सपा के प्रत्याशी अकेले ही मौजूद थे।
पंचायत चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद बसपा ने विधान परिषद चुनाव में भी जीत दर्ज कर सहारनपुर परिक्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम रखा, जबकि इसके विपरीत सपा और भाजपा पूरे चुनाव में बिखरी ही रही। मिशन-2017 में जुुटी भाजपा और सपा के ज्यादातर नेता इस चुनाव में मैदान में ही नहीं दिखाई दिए। राजनीतिक गलियारे में तो यहां तक चर्चा है कि सपा और भाजपा के कई नेता पूरे चुनाव में बसपा से साठगांठ करके मैदान से बाहर रहे।
आपको बता दें कि विधान परिषद चुनाव में यह सीट कांग्रेस से बसपा ने छीनी थी। वर्ष 2010 में बसपा के हाजी मोहम्मद इकबाल ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद वर्ष 2016 में हुए चुनाव में हाजी इकबाल ने अपने भाई महमूद अली को बसपा से प्रत्याशी बनवाया। हालांकि सपा ने पहले मुकेश चौधरी और फिर शहनवाज राणा को मैदान में उतारकर रोमांचक मुकाबले की उम्मीद जताई थी।
मगर, ऐन वक्त पर सपा ने प्रत्याशी बदलकर बसपा के सामने लगभग यह सीट परोस दी थी। उधर, भाजपा भी इस पूरे चुनाव में महज औपचारिकता ही निभाती नजर आ आई। मतगणना स्थल पर केवल बहुजन समाज पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता ही नजर आए। शेष दोनों पार्टियों के इक्का दुक्का नेता ही मतगणना स्थल पर दिखाई दिए। ऐसे में यही माना जा रहा है कि सपा और भाजपा ने परिणाम घोषित होने से पहले ही अपनी हार मान ली थी।