बेहट(सहारनपुर)। यूपी की सीमा से सटे उत्तराखंड के टिमली में दो दिन पहले पकड़ी गई 51 लाख रुपये की स्मैक की खेप मिर्जापुर से भेजी गई थी, जिसकी डिलीवरी कुंजा ग्रंट में ड्रग पैडलर्स को देनी थी। उत्तराखंड पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दंपती ने इसका खुलासा किया।
मादक पदार्थों की मंडी कहां जाने वाला मिर्जापुर एक बार फिर चर्चाओं में है। हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड राज्यों की सीमा से सटे इस क्षेत्र में यूपी के बरेली से स्मैक का कारोबार किया जाता है। यहीं से पड़ोसी राज्यों में स्मैक, चरस आदि मादक पदार्थों की डिलीवरी ड्रग पैडलर्स को दी जाती है। दो दिन पहले उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्र टिमली में पड़ोसी राज्य की सहसपुर थाना पुलिस द्वारा चेकिंग के दौरान सेंट्रो कार सवार दंपती को 51 लाख रुपये की 510 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए अशरफ पुत्र रुस्तम व उसकी पत्नी साबदा ने पूछताछ में सहसपुर पुलिस को बताया, कि वह उत्तराखंड के कुंजा ग्रंट में स्मैक की डिलीवरी देने जा रहे थे। स्मैक की यह खेप बरेली से लाई गई थी। उन्होंने यह भी बताया, कि वह मिर्जापुर के एक बड़े नशा कारोबारी के लिए काम करते है। उन्हें उत्तराखंड के कुछ ड्रैग पैडलर्स की सूची दी गई थी जिनके पास उन्हें स्मैक डिलीवरी पहुंचानी थी। मिर्जापुर में इतने बड़े पैमाने पर स्मैक व अन्य नशीले पदार्थों का धंधा चल रहा है, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। कार सवार जिस दंपती को उत्तराखंड पुलिस ने बॉर्डर क्षेत्र में गिरफ्तार किया, वह मिर्जापुर थाना और उसकी सीमावर्ती चौकी बादशाहीबाग से होकर उत्तराखंड पहुंचे। ऐसे में मिर्जापुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लाजमी है।