देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वा सरमा के हालिया मुस्लिम विरोधी बयानों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मौलाना मदनी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
शनिवार को जारी बयान में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि हिमंत के मुस्लिम विरोधी बयान न केवल अनुचित हैं, बल्कि संवैधानिक और नैतिक सिद्धांतों के साथ धोखे बाजी है। संविधान के तहत मुख्यमंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति सभी लोगों के साथ न्याय और निष्पक्षता के साथ पेश आए, लेकिन असम के मुख्यमंत्री इस बुनियादी सिद्धांत की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में यह बयान देने कि मैं पक्षपाती रहूंगा, यही मेरा सिद्धांत है और मैं मियां मुसलमानों को असम पर कब्जा नहीं करने दूंगा। ऐसे समय में आए हैं जब ऊपरी असम में 30 से अधिक उपद्रवी समूहों ने बंगाली मुसलमानों को क्षेत्र खाली करने की धमकी दी है।
मदनी ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे संवेदनशील समय में मुख्यमंत्री को सांप्रदायिक सौहार्द के लिए कदम उठाने चाहिए, न कि विभाजनकारी बयान देकर ऐसे उपद्रवियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एक भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यक को मियां कहकर अपमानित करने और उन्हें द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मौलाना ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष को पत्र भी भेजा है। जिसमें उन्होंने मामले में तुरंत कार्रवाई की मांग की गई है।