फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Saharanpur News: सहारनपुर में नगर पालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद का गणित

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर में नगरपालिका और नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद का गणित
विज्ञापन

नगर पालिका
देवबंद: आरक्षण घोषित होते संभावित प्रत्याशियों के खिले चेहरे
देवबंद। नगर पालिका चुनाव में आरक्षण की स्थिति साफ हो जाने के बाद संभावित प्रत्याशियों के चेहरे खिल उठे हैं। अनारक्षित श्रेणी में सीट आने के बाद से चुनाव की सरगर्मियां बढ़ गई है।
देवबंद जनपद की सबसे महत्वपूर्ण निकाय सीट है। वर्ष 2017 में नगरपालिका देवबंद की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थी। बसपा के जियाउद्दीन अंसारी जीते थे। उन्हें 18672 वोट मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर भाजपा के सिंबल पर वर्तमान जिलाध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह रहे थे। उन्हें करीब 12 हजार वोट ही मिल सके थे। पूर्व विधायक माविया अली ने सपा से चुनाव लड़ा था। माविया अली 11180 वोट प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे थे। वर्तमान चेयरमैन जियाउद्दीन के पुत्र जमाल अंसारी चुनाव लड़ने की तैयारी में है। भाजपा की ओर से कई दावेदार इच्छुक हैं। दून वैली स्कूल के चेयरमैन राजकिशोर गुप्ता, पूर्व सभासद हरिओम सिंघल, वर्तमान सभासद व नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनोज सिंघल, डॉ. चंदन सिंह राणा, अशोक गुप्ता, भाजपा के नगराध्यक्ष विपिन गर्ग आदि शामिल हैं।
विज्ञापन

गंगोह : सिपहसालार नहीं अब खुद लडे़ंगे चुनाव
गंगोह नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के बाद यहां इस बार अध्यक्ष पद के दावेदारों की संख्या बढ़ना तय है। सीट आरक्षित होने की आशंका में अभी तक कुछ दावेदारों की सांसें अटकी हुई थीं और वे ऐसी स्थिति में अन्य विकल्पों के जुगाड़ में लगे थे। अब इन्हें राहत मिली है और वे स्वयं चुनाव लड़ने की स्थिति में आ गए हैं। अभी तक चेयरमैन सीट के दावेदारों में पूर्व चेयरमैन नोमान मसूद, नीरज अग्रवाल, नरेंद्र तायल, हाजी सलीम कुरैशी, इरफान अलीम कुरैशी, असदुल्ला अजमेरी सहित अनेक लोग चर्चाओं में हैं। हालांकि सीट अनारक्षित होने की वजह से सभी पार्टियों में दावेदारों की संख्या बढ़ने के चलते पदाधिकारियों की सिरदर्दी बढ़ना भी तय है। वर्ष 2012 में नोमान मसूद ने अध्यक्ष का चुनाव जीता था, जबकि 2017 में सीट आरक्षित होने के चलते रूशदा बेगम को चुनाव लड़वाया था और वह विजयी रही थीं। इस बार सामान्य सीट होने के कारण उनके स्वयं ही या परिवार से किसी के चुनाव लड़ने की संभावना है। नीरज अग्रवाल सभासद होने के साथ बोर्ड में पार्टी के नेता भी हैं। नरेंद्र तायल के अलावा पूर्व सभासद डॉ. राकेश गर्ग का नाम भी अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों में लिया जा रहा है। इस समय सबसे ज्यादा उम्मीदवार भाजपा के टिकट के लिए चर्चाओं में दिखाई दे रहे हैं।
सरसावा: सामान्य और अनुसूचित जाति के दावेदार दौड़ से बाहर
सरसावा नगर पालिका परिषद का पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के साथ ही सामान्य तथा अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के मंसूबों पर पानी फिर गया है। गत योजना में यह पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था, जिसमें वर्तमान पालिका अध्यक्ष बिजेंद्र मोगा भाजपा की टीम के सहारे चुनावी वैतरणी पार गए कर गए थे। इस बार सामान्य वर्ग से भाजपा से नवीन जैन, सभासद राकेश साहनी, पूर्व सभासद संजय शर्मा, वर्तमान चेयरमैन बिजेंद्र मोगा, हरिपाल, गौरव पुहाल टिकट की कतार में थे। इनके अरमानों पर पानी फिर गया है। बसपा से नरेश चंद जैन, राव अखलाक, पूर्व सभासद प्रमोद पंवार, विनोद सहगल, प्रेम खन्ना भी दौड़ से बाहर हो गए। सपा से राव इसरार भी तैयारियों में जुटे थे। इन्हें भी आरक्षण ने झटका दिया है।
नकुड़ : सामान्य वर्ग के दावेदारों को लगा झटका
नकुड़ नगर पालिका अध्यक्ष पद इस बार पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। इससे इस बार वर्तमान चेयरमैन शाहनवाज खान, पूर्व चेयरमैन खालिद खान, व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सुभाष सिंघल, मनोज गोयल व राकेश सिंघल आदि के अरमानों पर पानी फिर गया है, जबकि पूर्व चेयरमैन धनीराम सैनी, भाजपा नेता राकेश वर्मा, रामनाथ कश्यप, बसपा नेता हाजी याकूब कुरैशी आदि के चेहरे खिल उठे हैं। गत चुनाव में बसपा के शाहनवाज खान ने भाजपा के शिवकुमार गुप्ता को करीब ग्यारह सौ वोटों से हराया था।
नगर पंचायत
छुटमलपुर : पहली बार मिलेगा चेयरमैन, सभी ठोंक सकेंगे ताल
छुटमलपुर। नवसृजित छुटमलपुर नगर पंचायत में पहली बार चुनाव होगा। अध्यक्ष पद को अनारक्षित रखा गया है। ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक सभी दावेदारों की बांछें खिल गई हैं। अब हर जाति वर्ग के लोग चुनावी अखाड़े में ताल ठोक सकेंगे। छुटमलपुर में बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग के दावेदार अध्यक्ष पद के चुनाव की ताल ठोंक रहे हैं। आरक्षण फाइनल होने तक इन सभी की सांसें अटकी थीं। देर शाम जैसे ही पता चला कि छुटमलपुर नगर पंचायत में अध्यक्ष पद को अनारक्षित रखा गया है तो इनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा है। अब ये दावेदार अपने अपने राजनीतिक दलों से टिकट की दौड़ में जुट गए हैं। यहां सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा के टिकट की दौड़ में हैं। सपा और बसपा से भी लोग टिकट की जुगत भिड़ा रहे हैं।
अंबेहटा : सभी दावेदारों के चेहरे खिले
अंबेहटा नगर पंचायत का अध्यक्ष पद अनारक्षित होने पर चुनाव की तैयारी में जुटे संभावित प्रत्याशियों के चेहरे खिल उठे हैं। इनमें जश्न का माहौल है। अभी तक दो पूर्व चेयरमैन सहित पांच लोग प्रबल दावेदारों के रूप में सामने आ रहे हैं। आरक्षण की स्थिति साफ हो जाने के बाद कसबे में राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं।
बेहट : शाह परिवार को फिर मिला किस्मत अजमाने का मौका
बेहट नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के अनारक्षित होने से सभी को मौका मिलेगा। फिर से शाह महमूद परिवार मैदान में होगा। 2017 से पहले तक बेहट नगर पंचायत की सीट सामान्य चली आ रही थी। ज्यादातर चुनाव में शाह परिवार बेहट नगर पंचायत की सत्ता पर काबिज रहा। 2017 में पहली बार अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था, जिसमें अब्दुल रहमान 2841 वोट मिले थे, जिन्होंने नफीस मलिक को 677 वोट के अंतर से हराया था। नफीस को 2164 वोट मिले थे, जबकि तीसरे नंबर पर संजीव कर्णवाल उर्फ बॉबी रहे थे। अब मौजूदा चेयरमैन, पूर्व चेयरमैन समेत तमाम दिग्गजों और पहली बार चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे दावेदारों के बीच सरगर्मियां बढ़ गई हैं।
चिलकाना : महिला प्रत्याशियों बीच होगा चुनाव
सुल्तानपुर चिलकाना नगर पंचायत अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित हुआ है। यहां पार्टी आधारित चुनाव न होकर स्थानीय गुटों के आधार पर होता रहा है। गुट भी यहां दो ही हैं। इन्हें मीर साहब और पंडित जयनाथ शर्मा गुट के नाम से जाना जाता है। कस्बे में 1988 में मीर साहब गुट के इस्माइल हुसैन चेयरमैन बने थे। 1995 में पंडित गुट की सुरैया बेगम चेयरपर्सन बनीं। उस समय पद महिला के लिए आरक्षित था। 2000 में पंडित गुट से फारूक कुरैशी। उस समय चेयरमैन का पद अनारक्षित था। 2006 में पिछड़ी जाति के अकबर कुरैशी, 2012 में महिला सीट से सुरैया जमाल मीर साहब गुट से चेयरपर्सन बनी थीं। 2017 में पिछड़ा वर्ग से पंडित गुट के अकबर कुरैशी चेयरमैन बने थे।
नानौता : अध्यक्ष पद सामान्य होने से दावेदार दिखे खुश
नानौता नगर पंचायत का चेयरमैन पद इस बार अनारक्षित है। वर्ष 2017 के चुनाव में महिला सीट पर नसीम फातिमा पत्नी सरफराज अख्तर उर्फ मुन्ना जैदी ने अपनी प्रतिद्वंद्वी पूर्व चेयरमैन अफजाल खान की पत्नी रूमाना खान को 700 वोट से मात देते हुए अध्यक्ष पद पर कब्जा किया था। अध्यक्ष पद अनारक्षित होने से विभिन्न दलों से तैयारी कर रहे आधा दर्जन से ज्यादा सामान्य वर्ग के प्रत्याशियों को इससे राहत मिली है। अब वे चुनाव में ताल ठोंक सकेंगे।
रामपुर मनिहारान : अध्यक्ष पद अनारक्षित होने से खिलीं बांछें
रामपुर मनिहारान नगर पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित है। इससे पहले वर्ष 2006 में यहां अध्यक्ष पद अनारक्षित था। उस समय अनिल अग्रवाल ने बहुत कम अंतर से जीत दर्ज की थी, जबकि चौधरी बाबू राम दूसरे स्थान पर रहे थे। उसके बाद 2012 में यह सीट ओबीसी महिला होने पर पूनम चौधरी ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 2017 के चुनाव में अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। उस समय शकुंतला देवी ने जीत दर्ज की थी, जबकि दूसरे स्थान कुलदीप बालियान रहे थे। अब अनारक्षित सीट होने से दर्जन भर दावेदारों में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन

तीतरों : सामान्य और अनुसूचित जाति के दावेदार हुए मायूस
तीतरों। पिछली बार तीतरों नगर पंचायत अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। उस समय मनोज कुमार ने अपने प्रतिद्वंद्वी कल्लू को 1200 वोटों के अंतर से हराया था। इस बार अध्यक्ष पद पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित होने से इस वर्ग से चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदारों में जहां उत्साह है, वहीं सामान्य और अनुसूचित वर्ग के दावेदार मायूस हो गए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें