विश्व पुस्तक दिवस.-
-सुरक्षित हैं कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर, प्रोफेसर छिब्बर, कृष्ण शलभ व केदारनाथ जैसे पुस्तक प्रेमियों के पुस्तकालय
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जगदीप कुमार
सहारनपुर। कहते हैं किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं, लेकिन बीते कुछ दशक से लोगों ने किताबों से रिश्ता तोड़ सा लिया है। अब चुनिंदा लोग ही हैं, जिनको किताबें पढ़ने का शौक रह गया है, लेकिन जनपद में कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनका किताबों के साथ कोई लगाव रहा हो या नहीं, लेकिन उन्होंने अपने बड़ों की संजाेई हुई किताबों को आज भी संभाले हुए हैंं। कहीं न कहीं वह इन किताबों के बीच अपने मन में अपनों की यादों को जिंदा रखे हुए हैं।
प्रख्यात साहित्यकार कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर एक ऐसा नाम है, जिन्होंने विदेशों तक में सहारनपुर को पहचान दी। उनका अपना पुस्तकालय, जिसमें वह अपनी लिखी किताबों के साथ ही अपने पसंदीदा लेखकों की किताबें रखते थे। उनके बाद उनके परिवार ने इस परंपरा को जीवित रखने की कोशिश जारी रखी है। उनका पुस्तकालय आज भी है, जिसको साधना स्थली कहते हैं।
ऐसा ही एक नाम रहा है केदारनाथ प्रभाकर का। वह लेखक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक व्यक्ति थे। अंबाला रोड स्थित रामतीर्थ केंद्र में इनका अपना पुस्तकालय था, जिसको उनके बेटे सर्वेश्वर प्रभाकर संभाले हुए हैं। महाराज सिंह कॉलेज में अंग्रेजी विभागाध्यक्ष रहे प्रोफेसर योगेश छिब्बर ऐसे साहित्य प्रेमी रहे। उनका विषय अंग्रेजी था, लेकिन वह हिन्दी में भी उतना ही बेहतर लिखते थे, जितना अंग्रेजी में। उनके पास हजारों किताबें थीं, जिसमें प्रत्येक विषय के साथ ही सभी धर्म ग्रंथ तक थे। उनके जाने के बाद उनके पुस्तकालय को उनके ही नाम से बेहट रोड स्थित एक स्कूल में शिफ्ट किया गया है। कृष्ण शलभ ने बाल गीतों के अलावा कई तरह की किताबें लिखीं। उनके निधन के बाद उनकी धर्मपत्नी हेमा शलभ उनके पुस्तकालय को संभाले हुए हैं।
इंदिरा गौड़ पैरामाउंट कॉलोनी में रहती थीं, जिनके पास अपना पुस्तकालय था। उनके जाने के बाद उनके पति ओपी गौड़ किताबों के जरिए उनकी याद को जिंदा रखे हुए हैं। डॉ. एन सिंह हिंदी साहित्य का जाना पहचाना नाम है। उनके पास अपना पुस्तकालय है, जिसमें साहित्य से जुड़ीं हजारों किताबें हैं।
मुन्नालाल कॉलेज की प्राचार्य रहीं डॉ. अमित अग्रवाल के पास बड़ी संख्या में किताबें हैं। डॉ. सुरेश त्यागी महाराज सिंह कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष रहे। यहां रामसंजीवन नगर में उनका अपना पुस्तकालय है, जिसमें साहित्य से जुड़ी किताबों की भरमार है।
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ऑनलाइन पाठन को मिल रहा बढ़ावा
जब से हाथ में स्मार्ट फोन आया है, तब से विद्यार्थी पठन सामग्री को फोन पर ही खोजकर पढ़ाई कर रहे हैं। मोबाइल आने के बाद किताबों से दूरी और बढ़ी है। इसके अलावा कहीं न कहीं ऑनलाइन पाठन को बढ़ावा भी दिया जा रहा है। नगर निगम ने अपनी पुराने पुस्तकालय का जीर्णोद्धार किया है, जिसमें तमाम तरह की पाठन सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध है। इसके लिए 50 कंप्यूटर पुस्तकालय में लगाए गए हैं। इसकी वजह से भी किताबें अलमारियों में बंद होकर रह गई हैं।
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अब नहीं लगते पुस्तक मेले
जनपद में वर्ष 2015, 16 और 17 में लगातार पुस्तक मेले लगाए गए, लेकिन उसके बाद आज तक कोई पुस्तक मेला नहीं लगाया गया है। मेला लगाने के सूत्रधार रहे मनीष कच्छल बताते हैं कि लोगों खासकर नई पीढ़ी के मन में किताबें पढ़ने की ललक जगाने के लिए वह प्रशासन के सहयोग से पुस्तक मेला लगवाते थे। देश भर के बड़े प्रकाशक मेले में आकर स्टॉल लगाते थे, लेकिन सहारनपुर के लोगों में किताब पढ़ने की दिलचस्पी नहीं आई। प्रकाशक चार से पांच दिन तक स्टॉल लगाकर खाली हाथ लौटते थे। यही वजह है कि उन्होंने बाद में आने से मना कर दिया।