चिलकाना में इमाम बारगाह के बाहर तैनात पुलिस।
- फोटो : SAHARANPUR
चिलकाना (सहारनपुर)। नगर में शिया समुदाय की ओर से मुहर्रम पर मातमी जुलूस नहीं निकाला गया। इमामबारगाहों में मजलिसों का आयोजन किया गया।
रविवार को मुहर्रम की दसवीं तारीख पर देश भर में फैली कोरोना महामारी को देखते हुए शिया समुदाय की ओर से इमाम हुसैन की याद में मातमी जुलूस नहीं निकाला गया। कस्बे में भारी पुलिस बल तैनात रहा। दोपहर को इमामबारगाह मजहर ए कर्बला में मुहर्रम की आखरी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना गमख्वार हैदर ने इमाम हुसैन के छह महीने के बच्चे हजरत अली असगर की शहादत पर रोशनी डाली। जिसको जालिमों ने तीन फाल के तीर से दर्दनाक तरीके से शहीद कर दिया था। जंग के मैदान में हजरत इमाम हुसैन खुद भी शहीद हो गए। इमाम हुसैन की शहादत का किस्सा सुनकर शिया समुदाय के सोगवार बिलख-बिलख कर रो पड़े। मजलिस में मरसिया खानी नयाब हुसैन ने पढ़ी। इस दौरान सैयद इस्माइल हुसैन, हुसैन इमाम, मुशर्रफ हुसैन, जायर हुसैन चांद, शाबाज अली, जावेद जैदी, आरिफ हुसैन, तारीफ हुसैन, मूसा इमाम आदि मौजूद रहे।