फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Saharanpur News: अगेती सब्जियों की पौध के लिए कारगर साबित हो रही लो टनल तकनीक

Wed, 25 Jan 2023 10:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
अगेती सब्जियों की पौध तैयार के लिए लो-टनल तकनीक कारगर साबित हो रही है। इसमें सब्जियों की अगेती पौध लो- टनल में तैयार की जाती है। इस पौध को लगाने से सामान्य की अपेक्षा सब्जियां 40 से 50 दिन पहले ही तैयार हो जाती है। अगेती सब्जी के बाजार में न सिर्फ बढि़या भाव मिलते हैं बल्कि उत्पादन अधिक एवं उच्चगुणवत्ता युक्त भी होता है।
विज्ञापन


सब्जियों की अगेती फसल से किसान सामान्य की तुलना में अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को अगेती पौध की आवश्यकता होती है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को लो टनल में सब्जियों की पौध तैयार करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। गर्मी के मौसम में अगेती सब्जियों की खेती के लिए जनवरी महीने में ही पौध की बुआई की जाती है। इनमें करेला, लौकी, तरबूज, खीरा, तोरी, छप्पन कददू, टिंडा, आदि सब्जियों की पौध शामिल हैं। फरवरी में वातावरण के अनुकूल होने पर लो टनल के ऊपर से प्लास्टिक की पन्नी को हटा लिया जाता है।

अगेती पौध के लगाने से सब्जियां सामान्य की अपेक्षा 40 से 50 दिन पहले तैयार हो जाती है। बाजार में अगेती सब्जियों के बढि़या भाव मिलने से न सिर्फ किसानों की आय में वृद्घि होती है बल्कि उनका उत्पादन और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। जनपद के कई प्रगतिशील किसान इस तकनीक से पौध तैयार रहे हैं। इनमें ग्राम नंदी के विनोद कुमार, रनियाला के सत्यपाल सिंह आदि शामिल हैं।
विज्ञापन


ऐसे तैयार होती है सब्जियों की पौध
लो टनल एक कम ऊंचाई वाली सुरंग के आकार की अस्थाई संरचना होती है। इसे प्लास्टिक की पन्नी से ढंका जाता है। इसमें ऊंचाई करीब डेढ़ फीट होती है। गर्मियों की सब्जियों की फसल के लिए इसमें जनवरी माह में ही पौध की बुआई प्लास्टिक की थैलियों में की जाती है। इससे पौध का पाले से बचाव होता है। क्योंकि अंदर का तापमान छह से दस डिग्री सेल्सियस रहता है, जो पौध के लिए अनुकूल होता है।

सब्जियों की अगेती पौध तैयार करने के लिए लो-टनल तकनीक बेहद कारगर है। अगेती सब्जियां सामान्य की तुलना में काफी पहले बाजार में पहुंच जाती है।जिससे किसानों को सब्जियों की बढि़या भाव मिलता है। कृषि विज्ञान केंद्र इस तकनीक को बढ़ावा दे रहा है। डॉक्टर शालिनी सिंह, विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यान), कृषि विज्ञान केंद्र।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें