सहारनपुर। नेत्रदान महादान है। इसका महत्व तब और बढ़ जाता है, जब आपकी दान की हुई आंखें किसी के जीवन में उजाला कर देती हैं। जिले के 948 लोग ऐसे हैं, जो मरणोपरांत अपनी आंखें दानकर अंधेरे में खोई एक नहीं दो-दो जिंदगियां रोशन कर गए।
सोमवार यानी आज विश्व नेत्रदान दिवस है। जिले में नेत्रदान कर मरने के बाद भी दुनिया देखने की ललक बढ़ती जा रही है। इससे उन हजारों दृष्टिहीन लोगों के जीवन में जीते जी रोशनी मिलने की उम्मीद बंधी है, जिनके जीवन में सिर्फ अंधेरा है। जो जीवित होने के बाद भी अपने मां-बाप, परिवार व संसार को अपनी आंख से देखने को तरस रहे हैं।
रोशनी आई बैंक अध्यक्ष सूरज जैन ने बताया कि उनसे पहले उनके पिता संस्था को चलाते थे। वर्ष 2000 से अब तक जिले में 948 लोगों ने नेत्रदान किया है। इनकी आंखों से दो हजार से अधिक लोगों को आंख की रोशनी मिल सकी है। इतना ही नहीं जनवरी 2024 से अब तक 1500 संकल्प पत्र भी भरे जा चुके हैं। उनका यह भी कहना है कि नेत्रदान करने वालों की संख्या में साल-दर-साल इजाफा हो रहा है।
- केस - एक
लिंक रोड स्थित शिवाजी नगर निवासी लता जैन (65) dh मरणोपरांत अपनी दोनों आंखें दान की हैa। उनके बेटे अमित जैन ने माता के मरणोपरांत रोशनी आई बैंक से संपर्क किया था। इसके बाद टीम ने तीन जून को कॉर्निया निकाल कर अस्पताल भेजा गया।
- केस - दो
मल्हीपुर निवासी राजेश जैन ने बताया कि उनकी माता ऊषा रानी ने इच्छा जताई थी कि मरणोपरांत उनकी आंखों को दान कर दिया जाए। इसके लिए संकल्प पत्र भरा था। नौ मई को आंखें दान की थीं। इनकी आंखों से किसी की जिंदगी में उजाला भरा है।
- आप भी कर सकते हैं नेत्रदान
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजीव मांगलिक ने बताया कि एचआईवी, कैंसर, हेपेटाइटिस आदि गंभीर बीमारी को छोड़कर कोई भी व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है। इसके लिए मौत के कुछ देर बाद चिकित्सकों की टीम को सूचित करना पड़ता है। छह घंटे के अंदर चिकित्सक काॅर्निया को निकाल लेते हैं।