सहारनपुर। धान के पत्ती लपेटक कीट पर अंकुश लगाने में रस्सी की लेफ्ट-राइट तकनीक कारगर साबित हो रही है। यह तकनीक सस्ती होने के साथ ही बेहद प्रभावी है।
जनपद में धान की फसल पर कई जगहाें पर पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप दिखने लगा है। यह कीट धान के पौधे की पत्तियों को लपेट लेता। कीट पत्तियों के हरे भाग को खाकर नष्ट करता है। इससे फसल की भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। प्रभावित फसल का विकास रुक जाता है। जिससे धान की फसल की उत्पादकता पर विपरीत असर पड़ता है। आमतौर पर किसान पत्ती लपेटक कीट से धान की फसल को बचाने के लिए रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं।
महंगे कीटनाशकाें का प्रयोग करने से धान की लागत बढ़ जाती है। इसके चलते कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को पत्ती लपेटक कीट पर अंकुश लगाने के लिए रस्सी की लेफ्ट राइट तकनीक का इस्तेमाल करने का सुझाव दे रहे हैं। इस तकनीक में दो व्यक्ति चार से पांच मीटर लंबी रस्सी के अलग अलग छोरों को पकड़कर धान की फसल के ऊपरी आधे भाग को झटका देते हुए चलते हैं। रस्सी के झटके से पत्ती लपेटक कीट धान की पत्तियों पर से नीचे पानी भरे खेत में गिरकर मर जाते हैं। इस तकनीक का प्रयोग आठ से दस दिन के अंतराल पर दो-तीन बार करना चाहिए। इससे पत्ती लपेटक के साथ ही तनाछेदक कीट के प्रकोप पर भी अंकुश लगता है।
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पत्ती लपेटक कीट पर नियंत्रण पाने में धान की लेफ्ट राइट रस्सी तकनीक काफी उपयोगी है। इसमें एक बार रस्सी का प्रयोग धान की फसल के ऊपर लेफ्ट से राइट और दूसरी बार राइट से लेफ्ट किया जाता है। यह तकनीक सस्ती होने के साथ ही बेहद कारगर भी है।
डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र