केरल में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उसने दौड़ में रजत पदक जीता था। इसके बाद वर्ष 2016 में वह अच्छे प्रशिक्षण के लिए सहारनपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम आ गया। यहां संदीप पुंडीर की देखरेख में उसने दौड़ शुरू की।
इसी दौरान कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतते हुए वर्ष 2018 में उसका चयन सेना में हुआ। सेना में उसके कोच सूबेदार यूनिस खान हुए। उनकी देखरेख में वह लगातार खेलता गया। अभी तक वह करीब सात राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुका है। कार्तिक का सपना ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।
कोच ने दी पदक जीतने की सूचना
सोनू ने बताया कि एशियन गेम्स के लिए चीन गए कार्तिक से उनकी बात कभी कभी होती है। क्योंकि वह वहां कड़ी मेहनत के साथ प्रतिभाग कर रहा है। उन्होंने बताया कि दस हजार मीटर दौड़ में रजत पदक जीत की सूचना उन्हें कोच यूनिस खान ने फोन कर दी। सूचना मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। उन्होंने बड़गांव से लड्डू मंगवाकर गांव में बंटवाए। ग्रामीण बधाई देने के लिए देर शाम तक घर पहुंचते रहे। इसके अलावा एथलेटिक्स से जुड़े लोग भी फोन पर बधाई दे रहे हैं।
छोटा भाई भी कम नहीं
कार्तिक का छोटा भाई अनुज कुमार भी कम नहीं है। वह फिलहाल पांच हजार मीटर दौड़ की तैयारी कर रहा है। अभी तक तीन बार प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में भाग ले चुका है। वह कार्तिक को अपना आदर्श मानता है। बेटे की इस उपलब्धि पर मां सुदेश भी गदगद है। सुदेश का कहना है कि उसे पता था कि बेटा एक दिन नाम रोशन करेगा।
जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव एवं अंतरराष्ट्रीय रेफरी डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि कार्तिक कुमार जुनूनी खिलाड़ी है, जिसने चीन में चल रहे एशियन गेम्स की दस हजार मीटर दौड़ में दूसरा स्थान प्राप्त करते हुए देश की झोली में रजत पदक डाला है। इससे पहले कार्तिक अनेक बड़ी प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर जनपद का गौरव बढ़ा चुका है। जनवरी 2018 में कार्तिक ने जापान के गीफू शहर में आयोजित 18वीं एशियाई जूनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में दस हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता था।
कार्तिक अंबेहटा चांद स्थित जनता इंटर कॉलेज का छात्र रहा है। वर्तमान में कार्तिक नेवी में सब इंस्पेक्टर हैं। डॉ. गुप्ता ने प्रतियोगिता से लौटने पर कार्तिक का भव्य स्वागत और सम्मान करने की बात कही है।