सहारनपुर। सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) बीमारी के फैलने का बड़ा कारण सिगरेट और बीड़ी का धुआं है। जनपद इस बीमारी से अछूता नहीं है। चिकित्सकों के यहां ओपीडी में प्रतिदिन काफी संख्या में सीओपीडी के मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि एक सिगरेट के पीने से जिंदगी के छह मिनट कम होते हैं।
विश्व सीओपीडी दिवस पर चिकित्सकों ने इस बीमारी से बचाव के बारे में बताया है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संजीव मिगलानी का कहना है कि मरीज को सुबह के समय खांसी आने लगती है। साथ ही गले में खिच-खिच रहने लगती है। दूसरे स्तर पर दौड़ते समय या थोड़ा सा भी भारी काम करते सांस फूल जाती है। तीसरे स्तर में नहाते और कपड़े पहनते हुए भी सांस फूल जाती है। चौथे और अंतिम स्तर पर हाथों और पैरों में सूजन आ जाती है। सिगरेट में तंबाकू के साथ कागज भी जलता है, जिसमें से 599 तत्व निकलते हैं। इन तत्वों में मुख्यत: निकोटिन, कार्बन मोनोक्साइड, आर्सेनिक और कैडमियम जैसे रसायन शामिल हैं। सीओपीडी के मरीजों को नाक पर मास्क पहनकर निकलना चाहिए।
जिला अस्पताल में फिजिशियन डॉ. अनिल वोहरा ने बताया कि जिन लोगों को यह बीमारी है, वे सबसे पहले धूम्रपान से ही परहेज करें। चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही इनहेलर और सांस में राहत के लिए जरूरी दवाओं का इस्तेमाल करते रहे। सीओपीडी के लक्षण सामने आने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
क्या है सीओपीडी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव मांगलिक ने बताया कि सीओपीडी इलाज योग्य बीमारी है, जो सांस फूलने, अधिक बलगम का निकलना और खांसी का कारण बनती है। सीओपीडी बढ़ने पर लोगों को अपनी सामान्य दिनचर्या में कठिनाई होती है।
सीओपीडी के लक्षण
-लंबे समय तक बलगम वाली खांसी
-सीने में घरघराहट और जकड़न
-सांस की कमी महसूस होना
ये बरतें सावधानी
-धूम्रपान न करें
-घरों में गैस चूल्हे का प्रयोग करना चाहिए।
-वायु प्रदूषण रोकने के प्रयास करने होंगे।
-कूड़े को जलाने की आदत को बदलें
-पुराने डीजल और खटारा वाहनों पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।
-नियमित रूप से जांच व आशंका होने पर संबंधित चिकित्सक से मिलें।
डा संजीव मिगलानी- फोटो : SAHARANPUR
डा अनिल वोहरा- फोटो : SAHARANPUR