महाभारतकालीन ऐतिहासिक शिव मन्दिर में स्थापित शिवलिंग
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तीतरों (सहारनपुर)। श्रावण माह में बरसी के ऐतिहासिक महाभारतकालीन शिव मंदिर में अपने आराध्य भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। शिव मंदिर के पुजारी अनिल गिरी का कहना है कि प्राचीन समय से मान्यता है कि क्षेत्र के किसी भी गांव के लोग श्रावण माह में हरिद्वार से जल व कांवड़ लाने के दौरान जब तक शिव मंदिर बरसी में भगवान आशुतोष का जलाभिषेक नहीं करते उनकी यात्रा संपूर्ण नहीं मानी जाती है। ऐसे में पूरे श्रावण माह मंदिर में श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है। मंदिर में जलाभिषेक करने के साथ-साथ कद्दू, फल, गुड़ की भेली का भोग भोलेनाथ को लगाया जाता है।
मंदिर का इतिहास
भीम ने एक ही रात में तपोबल से किया था मंदिर का निर्माण
शिव मंदिर बरसी का निर्माण अज्ञातवास के दौरान पांडव पुत्र महाबली भीम ने एक ही रात में अपनी पूजा अर्चना के बल पर किया था। मंदिर निर्माण के वक्त इसका मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में बन गया था, जो हिंदू मान्यताओं के अनुसार ठीक नहीं माना जाता जाता है। पुजारी अनिल गिरी बताते हैं कि जब भीम को अपनी भूल का अहसास हुआ तो उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की आराधना कर उनसे यह आशीर्वाद प्राप्त किया कि मंदिर का द्वार पश्चिम दिशा में होने के बावजूद यहां सच्चे मन से जो भी भगवान शिव की पूजा अर्चना करेगा उसकी मनोकामना जरूर पूरी होगी।
महंत अनिल गिरी बरसी- फोटो : SAHARANPUR
बरसी शिव मंदिर का मुख्य द्वार- फोटो : SAHARANPUR