देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने दारुल उलूम को गजवा-ए-हिंद और अंग्रेजी विषय के मुद्दे पर नोटिस देने वाले राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग (एनसीपीसीआर) के चेयरमैन को नोटिस भेजा है। यह नोटिस जमीयत के ओपन स्कूल को संगठित अपराध बताते हुए विदेशों से फंडिंग लेने का आरोप लगाने के मामले में दिया गया है।
जमीयत उलमा-ए-हिंद की तरफ से एनसीपीसीआर के चेयरमैन प्रियंक कानूनगो को यह नोटिस मौलाना महमूद मदनी की अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने भेजा है। इसमें जमीयत के स्कूलों के खिलाफ दिए अपने बयान वापस लेने और कानूनी कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है। नोटिस में कहा गया कि एनसीपीसीआर के चेयरमैन प्रियंक कानूनगो मदरसों और जमीयत उलमा-ए-हिंद जैसे देशभक्त संगठन को बदनाम करने के उद्देश्य से उन पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। जिसे किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसमें आगे लिखा गया है कि जमीयत के ओपन स्कूल अल्पसंख्यकों विशेषकर दीनी मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को राष्ट्र की मुख्यधारा के शैक्षिक अवसरों से जोड़ कर उन्हें सशक्त बनाने का कार्य करता है। जमीयत ओपन स्कूल कानूनी फ्रेमवर्क में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षण संस्थान (एनआईओएस) के माध्यम से धार्मिक मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक शिक्षा के अवसर प्रदान कराता है। ताकि वह आगे चलकर किसी भी क्षेत्र में न पिछड़ें और उनका भविष्य उज्ज्वल बन सके।
यह था मामला
राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग के चेयरमैन प्रियंक कानूनगो ने 13 मार्च को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल (एनआईओएस) को पत्र लिखकर जमीयत उलमा-ए-हिंद के शिक्षण संस्थान जमीयत ओपन स्कूल अभियान को संगठित अपराध की संज्ञा दी थी। इसके साथ ही इस पर विदेशों से फंडिंग प्राप्त करने विशेष रूप से पाकिस्तान से संबंध होने का निराधार आरोप लगाया गया था।