सहारनपुर। प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में की गई 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी से किसान नाखुश हैं। किसान संगठनों के नेताओं का कहना कि सरकार द्वारा की गई यह बढ़ोतरी किसानों के साथ मजाक है। इस मूल्य पर तो गन्ने की लागत भी नहीं निकल पाएगी। खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
बोले किसान-
प्रदेश सरकार द्वारा घोषित गन्ना मूल्य किसानों के साथ धोखा है। झबरेड़ा क्षेत्र के कोल्हुओं में ही इस समय 400 रुपये क्विंटल से अधिक भाव चल रहा है। लागत में काफी वृद्धि हो चुकी है। इस गन्ना मूल्य से किसान असंतुष्ट हैं। भारतीय किसान संघ किसानों की उपेक्षा का पुरजोर विरोध करेगा।
- श्यामवीर त्यागी, प्रांतीय संयोजक (गन्ना), भारतीय किसान संघ।
गन्ना मूल्य में मात्र 20 रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी करना किसानों साथ मजाक है। लागत को देखते हुए गन्ना मूल्य कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। प्रदेश के किसानों को इस बार गन्ना मूल्य में अच्छी वृद्धि की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने निराश किया है।
- नीरज चौधरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन (पथिक)
गन्ना मूल्य में मात्र 20 रुपये क्विंटल की वृद्धि से स्पष्ट है कि भाजपा के एजेंडे में किसान नहीं हैं। इस मूल्य से किसान के लिए गन्ने की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। प्राकृतिक आपदा के चलते इस बार गन्ना की पैदावार कम है। रही सही कसर गन्ना मूल्य से पूरी कर दी है। सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति से किसान बरबाद हो जाएंगे।
- चौधरी विनय कुमार, राष्ट्रीय सचिव भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)
प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में की गई बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे फसलों की लागत में भी इजाफा हो रहा है। ऐसे में सिर्फ 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया जाना किसानों के साथ विश्वासघात है। लागत को देखते हुए इस बार कम से कम 450 रुपये क्विंटल गन्ना मूल्य होना चाहिए था।
- चौधरी जगपाल सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक)