सहारनपुर। शासन की तरफ से गोवंश संरक्षण और गोशालाओं के रखरखाव की व्यवस्था परखने के लिए नोडल अधिकारी बना कर भेजे गए प्रदेश के विशेष सचिव कृषि ऋषिरेंद्र कुमार की जिले में मौजूदगी के बावजूद छुट्टा गोवंश सड़कों से लेकर खेत खलिहानों में नुकसान करना घूम रहा है।
पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी शत-प्रतिशत छुट्टा गोवंश को आश्रय स्थलों में भेजने के दावे कर रहे हैं। शुक्रवार को इनके दावों की पड़ताल की गई तो सच्चाई कुछ और सामने आई। बड़ी संख्या में गोवंश अभी भी खेतों में किसानों की फसलों को उजाड़ रहे हैं। गांवों कस्बों की गली मुहल्लों से लेकर हाईवे तक पर छुट्टा पशु बिना किसी रोक टोक के घूम रहे हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छुट्टा पशुओं पर नाराजगी जताते हुए प्रत्येक जिले के लिए नोडल अधिकारी नामित कर सात अप्रैल तक सभी पशुओं को गो आश्रय स्थल भेजने के कड़े निर्देश दिए थे।
दुपहर पौने 12 बजे बड़गांव बस स्टैंड पर छुट्टा गोवंश घूमता दिखाई दिया। दुपहर एक बजे इसी क्षेत्र के गांव महेशपुर में बस स्टैंड के पास गोवंश टहल रहा था। इसके दस मिनट बाद इसी गांव के रामचंद्र सिंह के खेत में दो गोवंश फसल को नुकसान पहुंचा रहे थे। महेशपुर गांव निवासी मुख्यमंत्री से सम्मानित किसान मदन सिंह बताते हैं कि सैकड़ों की संख्या में छुट्टा गोवंश अभी भी क्षेत्र में घूम रहा है। शिकायत के बावजूद अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं।
तीतरों के गांव मनोहरा में दुपहर डेढ़ बजे छुट्टा गोवंश किसान सुधीर के खेत में फसलों को चट कर रहा था। सुधीर ने खेत में पशुओं के लिए हरा चारा बो रखा है। सुधीर का कहना है कि पहले बरसीम की फसल गोवंश चट गए थे फिर गेहूं खराब कर दिया। वे पूरा दिन और रात में भी पहरा देने को मजबूर हैं।
दुपहर दो बजे देवबंद के तल्हेडी बुजुर्ग भूमिया खेड़ा पर चार गोवंश आराम करते दिखाई दिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन्हें भगाते हैं तो यह हमला करने पर उतर आते हैं। रामपुर मनिहारान तहसील परिसर में रोज की तरह शुक्रवार को भी छुट्टा पशु घूम रहे थे, जबकि यहां तहसील स्तरीय सभी अधिकारी बैठते हैं।
जानबूझ कर छोड़ रहे छुट्टा पशु
- जनपद में एक जनवरी से लेकर 31 मार्च तक अभियान चला कर 212 छुट्टा पशुओं को गोआश्रय स्थल में भेजा गया है। मगर अभी भी शिकायत मिल रही है कि कुछ लोग जान बूझकर कर अपने पशुओं को छुट्टा छोड़ रहे हैं, उनको लेकर भी अभियान चलाया जाएगा।
- डॉ राजीव सक्सेना
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी