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इमाम हुसैन थे इंसानियत के सबसे बड़े हिमायती

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चिलकाना में मजलिस को खिताब करते मौलाना - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर, चिलकाना। कस्बे के बड़ा इमामबाड़ा मजहर ए करबला में मोहर्रम की तीन तारीख को मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना वसीम अब्बास नकवी ने फरमाया कि जब इमाम हुसैन दो मोहर्रम को करबला की सरजमीं पर पहुंचे, तो यजीद के लश्कर के सरदार हुर ने इमाम हुसैन का रास्ता रोक दिया।
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इमाम हुसैन ने जब देखा कि हुर का लश्कर प्यासा है और हैवान भी प्यास के मारे जबान बाहर निकाले हुए हैं। इमाम हुसैन ने फौरन अब्बास अली अकबर तथा कासिम से कहा कि इन सब को पानी पिला दो। यह सब प्यास से हलाक हुए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जानवरों के आगे से उस वक्त तक पानी नहीं हटाना, जब तक वह खुद से मुंह ने हटा लें। लिहाजा हुक्मे इमाम के मुताबिक पानी पिलाया गया। इमाम हुसैन ने अपने किरदार से साबित कर दिया कि हमारे यहां कौमों, काबिले या दोस्त, दुश्मन नहीं देखा जाता, बल्कि इंसानियत देखी जाती है। यानी नफ्से मोहतरम की जान बचाना ही हमारा मकसद है। चाहे वह दोस्त हो या दुश्मन हो, इंसान हो या हैवान हो। मजलिस में मरसिया ख्वानी सईद हैदर ने की तथा नोहाख्वानी जैनी, तासीर, बिलाल, फरमान, दानिश, फैजी आदि ने की। मजलिस में मौलाना गमख्वार हैदर, पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि जायर हुसैन चांद, रिफाकत हुसैन, अहमद हुसैन, तनवीर हैदर, सईद, दानिश, मूसा ईमाम, प्रिंस, चंदू आदि रहे।

मजलिस में शामिल शिया सोगवार।- फोटो : SAHARANPUR

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