तीतरों। गांव मनोहरा में 3500 वर्ष पुरानी सिंधुकालीन सभ्यता का गवाह हुलासखेड़ा टीला प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अवैध कब्जाधारियों का शिकार बन गया है। करीब 50 साल पहले खोदाई के दौरान ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं मिलने पर पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित करते हुए बोर्ड तक लगाया था, लेकिन उसके बाद फिर किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर तीतरों-सालियर मार्ग स्थित ग्राम मनोहरा में हुलासखेड़ा टीला है। यहां पर सिंधुकालीन सभ्यता के चिह्न मौजूद हैं। यहां स्थित मंदिरों में आज भी पुराने समय के भित्तिचित्र व अवशेष मिले हैं। करीब 50 वर्ष पूर्व हुलासखेड़ा पर पुरातत्व विभाग ने पुरातत्वविद काशीनाथ दीक्षित के नेतृत्व में खोदाई कार्य कराया था। उस वक्त यहां सिंधुकालीन सभ्यता की तलवार, घड़े, बर्तन, ईंटें आदि मिले थे।
यह वस्तुएं आज भी दिल्ली स्थित संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई हैं। इन वस्तुओं के मिलने के बाद इस जगह को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित करते हुए यहां बोर्ड भी लगा दिया था, लेकिन अवैध कब्जाधारियों ने इस उखाड़ कर खुर्द-बुर्द कर दिया। टीले के चारों तरफ से अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने स्थायी निर्माण भी कर लिया है। इतना ही नहीं ग्राम पंचायत द्वारा भी टीले की कुछ जमीन को समतल करके खेल का मैदान बना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके लिए प्रशासनिक अनुमति भी नहीं ली गई है।
उधर, ग्राम प्रधान नितिश कुमार का कहना है कि हुलास खेड़ा पर गांव के बच्चों के खेलने के लिए मैदान बनाने के लिए समतलीकरण का कार्य किया गया है। उन्हें जानकारी नहीं थी कि पुरातत्व विभाग से भी यहां कुछ करने से पहले अनुमति लेनी हाेगी।
ये बोले ग्रामीण
-ग्राम मनोहरा के पूर्व प्रधान नवाब सिंह का कहना है कि हुलास खेड़ा की जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। इस भूमि के एक बड़े भाग को ट्रैक्टर और जेसीबी से जोत कर समतल कर दिया गया है, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
- ग्रामीण पदम सिंह का कहना है कि सिंधुकालीन सभ्यता के आधार स्तंभ आज भी पाए जाते हैं परंतु प्रशासनिक उपेक्षा के चलते हुलास खेड़ा की भूमि पर यह सभ्यता धीरे धीरे नष्ट हो रही है।
- ग्रामीण लखपतराय सैनी का कहना है कि करीब 50 साल पूर्व पुरातत्व विभाग के अधिकारी कई माह तक यहां रहे तथा यहां से पुरानी सभ्यता की निशानी तलवार, हथियार, घड़े, बर्तन आदि को ले गए थे परंतु इसके बाद यहां की अनदेखी कर दी गई।
- इतिहासकार राजीव उपाध्याय बताते हैं कि पिछले दिनों उन्होंने हुलास खेड़े की भूमि के संरक्षण की मांग जिलाधिकारी से की थी, लेकिन प्रशासन द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया।