सहारनपुर। भवनों के सर्वे के बाद गृह कर तीन से चार गुना तक बढ़ गया है। गृह कर के बिल देखकर भवन स्वामियों में खलबली मच गई है। वह कर जमा कराने की बजाय आपत्तियां लेकर नगर निगम पहुंच रहे हैं। बीते करीब एक माह में 200 से अधिक आपत्तियां गृह कर विभाग में पहुंच चुकी हैं। विभाग के अधिकारी तारीख लगाकर मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। जहां जरूरी है, वहां भवन के क्षेत्रफल की स्थिति को जानने के लिए जांच भी कराई जा रही है।
महानगर के भवनों का सर्वे वर्ष 2015 में कराया गया था। उस वक्त विभाग के कर्मचारियों के द्वारा सर्वे किया गया था, जिसका कोई फॉरमेट नहीं था। कर्मचारी घर-घर जाते थे और भवन स्वामी से मकान का क्षेत्रफल की जानकारी लेकर निगम में दर्ज कराते थे। माना जा रहा है कि चूंकि वह सर्वे विशेषज्ञों के द्वारा या किसी फॉरमेट पर नहीं किया गया था। ऐसे में उक्त सर्वे में कुछ लोगों के भवन या तो कम क्षेत्रफल में दर्ज हुए होंगे या फिर उन्होंने सर्वे के बाद भवन का विस्तार किया होगा, जिसकी वजह से अब कर बढ़कर लगा है। 2015 के सर्वे में 1.29 लाख भवन पंजीकृत किए गए थे।
इस बार भवनों के सर्वे के लिए शासन ने एक कंपनी को ठेका दिया है। सर्वे में कंपनी के कर्मचारी भवनों का क्षेत्रफल आदि निकालकर उसे दर्ज कर निगम के गृह कर विभाग में दर्ज करा रहे हैं। सात साल बाद हो रहे सर्वे में करीब 20 हजार नए भवनों के जुड़ने का अनुमान है। जिसके बाद नगर निगम में पंजीकृत भवनों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक पहुंचने की संभावना है।
जिन भवनों का सर्वे हो चुका है, उनको नगर निगम की ओर से गृह कर के नए बिल भेजे गए हैं। लोगों के घर तीन से चार गुना अधिक तक कर लगाया गया है, जिसे लेकर लोग टेंशन में आ गए हैं और नगर निगम में लिखित आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। कर अधीक्षक के अनुसार करीब 200 आपत्तियां हाल फिलहाल में आ चुकी हैं। जिनकी सुनवाई की जा रही है।
कर बढ़ने के उदाहरण
वार्ड-----आपत्ति देने वाले का नाम---पहले कर----बढ़ा कर
25------जयप्रकाश--------------1,635------5,968
38------सुमन------------------990-------2,330
38------नीरज------------------918-------3,207
25------शशि रानी---------------960-------2,792
25------हेमलता-----------------856-------2,052
25------लक्ष्मी रावत--------------700-------2125
विभाग ने शुरू की आपत्तियों की सुनवाई
गृह कर विभाग के अधिकारियों ने आपत्तियों के निस्तारण के लिए सुनवाई शुरू कर दी है। अभी तक करीब 15 भवन स्वामियों को डेट देकर सुनवाई के लिए बुलाया जा चुका है। सुनवाई में निगम के अधिकारी उनका पक्ष सुन रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति को यह लगता है कि उनका भवन कम क्षेत्रफल में है और सर्वे में वह अधिक दर्शाया गया है तो विभाग उनके भवन की जांच भी करा रहा है, जिससे भवन स्वामी का शंका को दूर किया जा सके।
सर्वे के बाद कुछ लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है कि उनका गृह कर तीन से चार गुना अधिक आया है, लेकिन हमें नहीं लगता कि कर गलत लगा है। क्योंकि कंपनी तकनीक के तहत सर्वे कर रही है। हो सकता है 2015 के सर्वे में कुछ खामियां रहीं हों या फिर भवन स्वामी ने भवन का विस्तार किया हो। फिर भी आपत्तियों के निस्तारण के लिए सुनवाई की जा रही है। जिससे लोगों की आशंका को दूर किया जा सके।
- सुधीर शर्मा, कर अधीक्षक