सहारनपुर। तमाम प्रयासों के बाद भी लोग एड्स के प्रति जागरूक नहीं हो रहे हैं। इसी के चलते जिले में निरंतर एचआईवी एड्स मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है। 11 महीने के अंदर जिले में एड्स के 231 नए मरीज मिले हैं। एसबीडी जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में कुल 1931 एचआईवी पीड़ितों का उपचार चल रहा है। इनमें 21 थर्ड जेंडर भी शामिल हैं।
शुक्रवार यानी आज विश्व एड्स दिवस मनाया जाएगा। एड्स लाइलाज है, लेकिन दवाओं के नियमित सेवन, तनावमुक्त, जीवनशैली अपनाकर एड्स होने पर लंबी जिंदगी जी सकते हैं। एसबीडी जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में पिछले कुछ सालों से एड्स पीड़ितों की संख्या में इजाफा हुआ है। इस साल में अब तक 231 एचआईवी पीड़ित मिल चुके हैं। इनमें 156 पुरुष, 63 महिला और 12 बच्चे शामिल हैं, जबकि नए व पुराने मिलाकर कुल 1931 मरीजों का उपचार एआरटी सेंटर में चल रहा है। इनमें 1135 महिला, 675 पुरुष, 21 थर्ड जेंडर और 107 बच्चे हैं।
यहां होती हैं एचआईवी एड्स की जांच
आईसीटीसी सेंटर एसबीडी जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, फतेहपुर, नानौता, देवबंद, गंगोह।
एचआईवी के लक्षण
- गले में लगातार सूजन का होना
- लगातार वजन घटते जाना
- कोई भी बीमारी होने के बाद ठीक न होना
- मुंह में घाव, त्वचा में खुजली, दर्द होना, सेहत का लगातार गिरना आदि
ऐसे फैलता है संक्रमण
- संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क से
- संक्रमित सिरिंज व सुई का दूसरों के द्वारा प्रयोग करने से
- संक्रमित मां से शिशु को जन्म से पूर्व, प्रसव के समय या प्रसव शीघ्र बाद
ऐसे करें बचाव
- मादक औषधियों के आदी व्यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सिरिंज व सुई का प्रयोग न करें
- जब कभी खून की जरूरत हो, पंजीकृत ब्लड बैंक से जांच किए गए खून का ही उपयोग करें
- चिकित्सीय उपकरणों को 20 मिनट पानी में उबालकर जीवाणुरहित करके ही उपयोग में लें
लोगों में एड्स को लेकर जागरुकता की कमी है। यहीं कारण है कि लोग चपेट में आ रहे हैं। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर घबराना नहीं चाहिए। बीमारी होने पर बताएं। अब बेहतर और असरदार दवाएं उपलब्ध हैं।
- डॉ. सर्वेश कुमार, नोडल अधिकारी